चौहार घाटी में बारिश के अभाव के चलते पीली पड़ी जौ की फसल। संवाद
बरोट (मंडी)। चौहार घाटी व छोटा भंगाल की ऊंची चोटियों में इस बार अभी तक बारिश और बर्फबारी न होने से बसंत के फूल आने से पहले ही सरसों पीली हो गई है। यही नहीं किसानों की नकदी फसलें लहसुन, प्याज और जौ की फसलें भी खराब होने की कगार पर हैं। किसानों की ओर से बाजार से महंगे दामों पर खरीदे बीज और खेतों में की गई मेहनत पर पानी फिर गया है। यदि अब भी बारिश नहीं हुई तो किसानों को आर्थिक हानि भी झेलनी पड़ेगी।स्थानीय किसानों में राम सिंह, लच्छी राम, बीरी सिंह, प्रेम चंद, लछमण दास और रामचंद का कहना है कि इस बार बारिश न होने से किसानों की सैकड़ों बीघा भूमि पर की गई नकदी फसलों की खेती बर्बाद होने की कगार पर है। पहली बार इस तरह का मौसम देखने को मिला है। हालांकि हर वर्ष दिसंबर और जनवरी में प्रदेश भर में अच्छी बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होती रही है। बताया कि बारिश और बर्फबारी की आस लिए घाटी के लोग देव पशाकोट, देव हुरंग नारायण सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर उनके मंदिरों में बारिश की फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं। बर्फबारी न होने से घाटी की ऊंची चोटियां खाली पड़ी हैं। प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं। ऐसे में लोगों को पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। बारिश और बर्फबारी के बिना बगीचों में सेब, प्लम सहित अन्य गुठलीदार पौधे सूखने लगे हैं। वहीं, बारिश न होने से घाटी में सर्दी-खांसी, जुकाम-बुखार के मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। यदि दो चार दिनों में बारिश नहीं होती है तो लोगों की परेशानी और भी बढ़ जाएगी।
इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक राजेश डोगरा ने कहा कि सिंचित इलाकों में किसान फसलों की सिंचाई करें। वहीं बारिश-बर्फबारी न होने से कहां पर फसलों को कितना नुकसान हुआ है, इस संबंध में फील्ड से रिपोर्ट ली जा रही है।