मंडी। आमदनी चार आने और खर्चा रुपैया वाले नगर निगम मंडी की आर्थिकी स्थिति अब चरमराने लगी है। नगर निगम के खजाने में हर माह 25 से 27 लाख रुपये ही आ रहे हैं, जबकि खर्चा 1.20 करोड़ रुपये हो रहा है। ऐसे में वार्डों में कई विकास कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। नगर निगम कर्मचारियों के वेतन, उनके मेडिकल बिल, स्ट्रीट लाइट बिल और कूड़े आदि पर हर माह 1.20 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। उधर, सरकार की ओर से ढाई साल तक ही ग्रांट देने की सूचना पर नगर निगम की चिंताएं बढ़ती नजर आ रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में नगर निगम आय के स्रोत बढ़ाने के लिए विभिन्न सुविधाओं पर टैक्स बढ़ा सकता है। फिलहाल नगर निगम केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट पर ही निर्भर है। प्रदेश सरकार की ओर से पहले जो 8.60 करोड़ की ग्रांट जारी हुई थी, वह आधी खर्च न करने की बात कही गई थी। सोमवार को महापौर ने नगर निगम की वित्तीय हालत को देखते हुए प्रदेश सरकार से हेड ग्रांट रिलीज करने की मांग की, ताकि वार्डों में विकास कार्यों को गति दी जा सके। वहीं, आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण नगर निगम कर्मचारियों के खाली पदों को भरने में भी असमर्थ है।
बॉक्स
आपदा में नुकसान के 36 करोड़ भी नहीं मिले
पिछले साल अगस्त माह में आपदा से नगर निगम के विभिन्न वार्डों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए 36 करोड़ रुपये का प्राक्कलन कर सरकार को भेजा था, लेकिन अभी तक उसका पैसा भी रिलीज नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों के घरों को बचाने के लिए डंगे, नालों के चैनलाइजेशन समेत कई कार्य लंबित हैं। आपदा प्रभावितों को नगर निगम सिर्फ तिरपाल समेत फौरी राहत ही दे पाया है।
कूड़े और हाउस टैक्स के लाखों रुपये फंसे
बेशक नगर निगम की हालत पतली होती जा रही है, लेकिन वह सरकारी और प्राइवेट संस्थानों से कूड़े के बिल और हाउस टैक्स के फंसे लाखों रुपये भी वसूल नहीं पा रहा है। इसके अलावा आय के स्रोत बढ़ाने पर भी गंभीर नहीं दिख रहा है।
कोट्स
सुनने में आ रहा है कि सरकार की ओर से ढाई साल तक ही ग्रांट दी जाएगी। इसके बाद नगर निगम को खुद अपनी आय का इंतजाम करना होगा। सरकार से हेड ग्रांट के 4 करोड़ और आपदा में हुए नुकसान के 36 करोड़ रुपये रिलीज करने की मांग रखी गई है।- वीरेंद्र भट्ट शर्मा, महापौर नगर निगम