फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंडी में मंडकू का ढाबा, भूत कहानियों का मंचन

विज्ञापन
मंडी के सतोहल में कथाकार योगेश्वर शर्मा की कहानियों का मंचन करते नाट्य अकादमी के कलाकार। - फोटो : Mandi
विज्ञापन
मंडी। हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं नाट्य रंगमंडल के कलाकारों ने हिंदी के वरिष्ठ कहानीकार योगेश्वर शर्मा की दो कहानियों मंडकू का ढाबा और भूत का सफलतापूर्वक मंचन सतोहल में किया। अकादमी की सचिव सीमा शर्मा ने बताया कि योगेश्वर शर्मा अपनी रचनाओं में पूरी तरह से रच बस जाते हैं।
विज्ञापन

मंडकू का ढाबा कोरोना काल में हुए मानवीय संवेदनाओं की शून्यता को दर्शाता है। इसमें मंडकू अपने दादा-परदादा के समय से जलेबियां बनाने का काम कर रहा है। वैश्विक महामारी के चलते उसका सब कुछ नष्ट हो जाता है। नई पीढ़ी महामारी की चपेट में आ जाती है।
उनकी दूसरी कहानी भूत जो एक डर की अभिव्यक्ति है। इसे मंडयाली बोली में डड्डा कह कर संबोधित किया जाता है। भूत क्या है और आदमी क्या, जबकि दोनों जातिवाचक संज्ञा हैं। जहां धीरे-धीरे यह ज्ञान हो जाना कि अब भूतों से डर नहीं लगता क्योंकि वे किसी बेसहारा, निर्बल को जानबूझकर डराते नहीं।
विज्ञापन

उनकी भी मर्यादा होती है। कहानी समाज को एक बहुत बड़ा दृष्टांत देने में सक्षम है। दोनों कहानियां रचनाधर्मिता के प्रति समर्पित है। इन कहानियों का निर्देशन अयान दास गुप्ता ने किया। कहानी मंचन का संयोजन सीमा शर्मा ने किया। कहानी के पात्रों में नीरज, देव, अखंड, राहुल, विवेक, ध्रुव, अभय, आलोक, ओमकार, निलेश, देवांग, मधुसूदन, फ्रेंडी ने सराहनीय कार्य किया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें