मंडी। देव पराशर ऋषि की तपोस्थली पराशर झील विश्व के पर्यटन मानचित्र पर जल्द उभरेगी। प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज धार्मिक स्थल को आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के रंग भरने की कोशिश शुरू हो गई है। ट्रैकिंग के शौकिनों को पराशर तक पैदल पहुंचने के लिए छह ट्रैकिंग रूटों की जीपीएस मार्किंग होगी।
सैलानी झील तक पहुंचने के रोमांच के साथ-साथ यहां पाई जाने वाली जड़ी बूटियों की भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। पर्यटन स्थल को 12 महीने सैलानियों के लिए खुला रखने की योजना पर जिला प्रशासन काम कर रहा है। पैराग्लाइडिंग और स्कीइंग से साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। पूरी घाटी में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा।
पराशर झील के पर्यावरण पर पर्यटन से कोई दुष्प्रभाव न हो, इसलिए यहां पर होटलों कीबजाय मिट्टी के होम स्टे और कैंपिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा। पर्यटकों के ठहरने के लिए कैंपिंग/टेंट्स की व्यवस्था होगी। बेरोजगार युवाओं को ट्रैक गाइड, बर्ड वॉचिंग, सॉफ्ट स्किल्स और हॉस्पिटेलिटी आदि में प्रशिक्षित किया जाएगा।
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इन ट्रैक की होगी जीपीएस मार्किंग
थट्टा से पराशर झील तक के ट्रैक की मार्किंग की जा चुकी है। इसकी दूरी नौ किलोमीटर बनती है। पराशर से लगशाल की जीपीएस मार्किंग भी कर ली गई है। शीघ्र ही क्षेत्र ही भनूठी, कालंग रूट की भी जीपीएस मार्किंग कर पूरे क्षेत्र को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाया जाएगा।
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चार गांवों में बनेेंगे होम स्टे
पराशर ऋषि मंदिर के निकट चार गांव लगशाल, थट्टा, भनोठी और कालंग को चयनित किया गया है। यहां ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। यहां कच्चे मकानों को बनाया जा रहा है। होम स्टे को विकसित किया जाएगा। सैलानी कच्चे घरों में रहकर गांव का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। चूल्हे पर खाना बनाया जाएगा।
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ये होंगे सुधार
- रास्तों में विश्राम के लिए लगेंगे बेंच
-काष्ठकुणी शैली में बनेंगे रेन शेल्टर
- पैदल रास्तों का होगा विकास
-पार्किंग एवं प्रसाधन सुविधा
-12 महीने निर्बाध बिजली-पानी
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संभावनाओं को तलाशने की कोशिश कर रही सरकार : जवाहर
विधायक जवाहर ठाकुर ने कहा कि पराशर में पर्यटन की की अपार संभावनाएं हैं। यहां सभी प्रकार के पर्यटन के साथ एयरो स्पोर्ट्स एवं अन्य साहसिक खेल गतिविधियों के लिए भी उपयुक्त स्थल हैं। सभी संभावनाओं को तलाशने और बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
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जानिए पराशर के बारे में
जिला मंडी में द्रंग क्षेत्र में पराशर 2,730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंडी शहर से यह स्थल करीब 45 किमी दूर है। पराशर झील की 300 मीटर परिधि है। इसमें एक तैरता द्वीप है। झील का स्वच्छ पानी आकर्षण को बढ़ाता है। 13-14वीं शताब्दी में राजा बन सेन ने मंदिर का निर्माण किया है। इसमें ऋषि पिंडी (पत्थर) के रूप में मौजूद हैं।
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तीन वाहन मार्गों का काम पूरा
पराशर के लिए कटौला सड़क के अलावा तीन और वाहन योग्य रास्तों का काम पूरा कर लिया गया है। अब इन्हें पक्का करने के लिए काम किया जाएगा। इनमें हणोगी-पराशर, पनारसा-ज्वालापुर-पराशर और पंडोह-शिवाबदार-पराशर सड़कें शामिल हैं।
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पैराग्लाइडिंग की मंजूरी, स्कीइंग की तलाशी जा रही संभावना : डीसी
डीसी मंडी अरिंदम चौधरी ने बताया कि पराशर में पर्यटक पैराग्लाइडिंग का रोमांचक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। पर्यटन विभाग की टीम ने पैराग्लाइडिंग के लिए पराशर के चंडोहीढाल से कांढा साइट को मंजूरी मिल चुकी है। स्कीइंग की संभावनाओं को तलाशा जा चुका है। नतीजतन साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
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