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पर्यावरण से प्यार, अब बच्चों का भविष्य रहीं संवार

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मंडी शहर के भ्यूली में पौधे रोपती महिला कृष्णा ठाकुर। - फोटो : Mandi
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मंडी। डाक विभाग से सेवानिवृत्त डाकपाल कृष्णा ठाकुर पर्यावरण सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यहीं नहीं प्रवासी बच्चों को घर बुलाकर अक्षरज्ञान दे रही हैं। स्कूलों में पढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बाकायदा बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया। इसके लिए वह अपनी पेंशन का कुछ हिस्सा भी खर्च कर रही हैं।
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कृष्णा ठाकुर ने भ्यूली स्थित ब्यास वाटिका में अनेक औषधीय पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें प्रकृति से बेहद स्नेह है।
आधुनिक दौर में प्रकृति से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसलिए प्रकृति बचाने के मकसद से जब भी समय मिलता है, पड़ोसियों और अन्य सहयोगियों से पौधरोपण करती हूं। 2018 में मंडी डाकघर से सेवानिवृत्त 63 वर्षीय कृष्णा ठाकुर पुरानी मंडी की निवासी हैं। उनके पति डॉ. देवेंद्र ठाकुर आयुर्वेद विभाग से सेवानिवृत्त हैं। कृष्णा का कहना है कि जीवन के अंतिम पड़ाव तक वह इस कार्य में जुटी रहेंगी।
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250 औषधीय पौधे लगाए
पड़ोसी भाई गुरुचरण के साथ मिलकर कृष्णा ठाकुर ने भ्यूली स्थित ब्यास वाटिका में अब तक 250 औषधीय पौधे लगाए हैं। इनमें हरड़, बहेड़ा, आंबला, पीपल, बड़, केला, अनार, नीम, आम सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। उनकी भावना को देख पौधों की सिंचाई के लिए जल शक्ति मंत्री ने वाटिका में नल की सुविधा दी है। उपायुक्त मंडी की तरफ से डेढ़-दो लाख रुपये से वाटिका की बाड़बंदी की गई है।
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अम्मी आई अम्मी आई... कहते हैं बच्चे
कृष्णा कहती हैं कि भ्यूली की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले 30 बच्चों को स्वयं पढ़ाया और स्कूल में उनका दाखिला भी करवाया है। जब भी प्रवासी बच्चे उन्हें देखते हैं तो अम्मी अम्मी आई कहते हुए फूले नहीं समाते।
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