मांडव बुक कैफे की अंदर से हालत। संवाद
मंडी। नगर निगम मंडी के ऐतिहासिक घंटा घर के भूतल में शुरू किया गया द मांडव बुक कैफे बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। इसे खोलने वाला नगर निगम भी अंजान है की यह बुक कैफे क्यों बंद हुआ। पठन-पाठन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खोला गया यह कैफे अब धीरे-धीरे स्टोर के रूप में तबदील होता जा रहा है। पूर्व महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा ने चार मार्च 2024 को इस बुक कैफे की शुरुआत की थी।
यहां मंडी जिले के प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाएं, लोक कथाओं और मंडी के समृद्ध इतिहास से जुड़ी पाठ्य सामग्री निशुल्क पढ़ने के लिए उपलब्ध कराई गई थी। शुरुआती दौर में शहर के बुजुर्गों, युवाओं और विद्यार्थियों की यहां अच्छी-खासी आवाजाही रहती थी, लेकिन नगर निगम की अनदेखी के चलते कुछ ही समय बाद यह कैफे बंद रहने लगा। करीब एक साल से यहां कई बार ताला लटका हुआ मिलता है जिसके कारण किताबें और कुर्सियां धूल फांक रही हैं। आलम यह है कि अब कैफे के स्थान पर केवल बाहर लगे बोर्ड ही नजर आते हैं और पढ़ाई के लिए आने वाले बच्चों ने भी इससे किनारा कर लिया है।
महापौर सुमन ठाकुर ने बताया कि मामला ध्यान में आया है। इसके संचालन के लिए एक कर्मचारी तैनात करने का प्रस्ताव हाउस में रखा जाएगा जिससे निगम की ओर से दी गई कोई भी सुविधा बंद न हो।
ऐतिहासिक घंटा घर में बुक कैफे की शुरुआत बेहद सराहनीय थी, लेकिन लगातार बंद रहने के कारण लोगों ने यहां आना छोड़ दिया। -सार्थक कश्यप, स्थानीय निवासी थनेहड़ा
यह नगर निगम की एक बेहतरीन पहल थी, लेकिन उचित रखरखाव और ध्यान न दिए जाने की वजह से विद्यार्थियों का रुझान खत्म हो गया। -सुमिता राणा, करसोग निवासी छात्रा