रजोगड़ा की प्राचीन बावड़ी के जीर्णोद्धार में मिले मूर्ति और आमलक। स्त्रोत- जागरूक पाठक
करसोग (मंडी)। क्षेत्र के रजोगड़ा गांव की प्राचीन बावड़ी के जीर्णोद्धार के दौरान खोदाई में मूर्ति और आमलक मिलने से क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर चर्चा में आ गई है। पुरावशेष मिलने के बाद स्थानीय लोगों में बावड़ी और इसके आसपास के इतिहास को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
खोदाई में मिला आमलक प्राचीन भारतीय मंदिर स्थापत्य का महत्वपूर्ण वास्तु-अंग माना जाता है, जिसे सामान्यतः मंदिर के शिखर के ऊपरी हिस्से में स्थापित किया जाता था। वहीं, मिली मूर्ति भी इस स्थल के ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक महत्व की ओर संकेत करती है। हालांकि, इन अवशेषों की वास्तविक प्राचीनता, कालखंड और मूल संदर्भ की पुष्टि पुरातात्त्विक विशेषज्ञों के अध्ययन के बाद ही हो सकेगी।
स्थानीय धार्मिक परंपराओं में रजोगड़ा की बावड़ी का विशेष महत्व बताया जाता है। क्षेत्रवासी यहां से माहूं नाग देवता शलोट और देव धड़यास देवता शलाणा के स्नान के लिए शुद्ध जल ले जाते हैं। स्थानीय निवासी रमेश शास्त्री के अनुसार, यह परंपरा जलस्रोत के प्रति लोगों की आस्था और देवसंस्कृति से इसके गहरे संबंध को दर्शाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बावड़ी महज जलस्रोत नहीं, बल्कि पारंपरिक जल संरक्षण व्यवस्था, लोक आस्था और क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों से जुड़ी धरोहर है। जीर्णोद्धार के दौरान मिले पुरावशेषों का सुरक्षित संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है तो इससे क्षेत्र के अतीत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उधर, पुरातत्व विभाग के अधिकारी विनय राय ने बताया कि मामला ध्यान में नहीं आया है।