महिलाओं को 31 मार्च के बाद नहीं मिलेगी रियायती सेवा
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को बस किराये में छूट दी जा रही है। 31 मार्च तक कार्ड बनाए जाएंगे। इसके बाद कार्ड के बिना रियायती सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। बाहरी राज्यों की कई महिलाएं भी इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं। कार्ड बनाने से यह पता चल सकेगा कि वास्तविकता में कितनी महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इससे सरकार से सब्सिडी लेने के लिए आंकड़ा भी प्राप्त हो जाएगा। पहले वर्ष में 236 रुपये में कार्ड बनाया जा रहा है। इसमें 18 फीसदी जीएसटी शामिल है। अगले वर्ष जीएसटी सहित 177 रुपये के वार्षिक शुल्क में कार्ड बनेगा।
सुधीर बोले, 1500 रुपये नहीं मिले, मुकेश ने कहा कि 15 लाख कहां हैं
सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार की महिलाओं को 1500 रुपये देने की गारंटी थी। जब तक सभी महिलाओं को 1500 रुपये नहीं मिल जाते, तब तक हिम बस कार्ड की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। इस पर मुकेश ने पलटवार कर कहा कि सभी को 15-15 लाख रुपये देने का क्या हुआ। 15 लाख मिलने तक क्या सभी को छूट दे दी जाए। इस पर नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि 15 लाख रुपये कालाधन वापस आने पर देने की बात हुई थी। इस पर मुकेश ने कहा कि सही बात है, कालाधन तो विदेश से आया नहीं है। देश का पैसा लेकर कुछ लोग जरूर विदेश चले गए।
महिलाओं को किराये में रियायत से पड़ा 82 करोड़ का आर्थिक बोझ
शिमला। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि एचआरटीसी पर महिलाओं को किराये में दी जा रही रियायत से 82.27 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ा है। निगम की बसों में महिलाओं को किराये में 50 फीसदी की छूट दी जा रही है। प्रति माह औसतन 37 लाख 77 हजार 940 महिलाएं इस योजना से लाभान्वित होती हैं। वर्ष 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 4 करोड़ 91 लाख 13 हजार 220 महिलाओं ने इसका लाभ लिया।