गाड़ागुशैन के तहत आते अलवाह गांव में स्थानीय युवा द्वारा तैयार किया गया डुप्लेक्स हट। संवाद
थुनाग (मंडी)। हिमाचल प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर गाड़ागुशैण क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। यहां की नैसर्गिक सुंदरता और पर्यटकों की चहल-कदमी होने के बाद अब स्थानीय युवा पर्यटन व्यवसाय में कदम बढ़ा रहे हैं। अब तक क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक होम स्टे और अत्याधुनिक कॉटेज तैयार हो चुके हैं। यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन हुए हैं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर दे रहे हैं।
सरकार ने भी इस क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को पहचाना है। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खौली में लगभग 3.50 करोड़ रुपये की लागत से नेचर पार्क का निर्माण कर रही है। इससे आने वाले दिनों में पर्यटकों को और भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि नेचर पार्क में टहलने, मेडिटेशन और योगाभ्यास के लिए विशेष सुविधाएं बनाई जा रही हैं। इस पार्क का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। यहां हट्स भी बनाए जा रहे हैं, जहां पर्यटक सुकून के पल बिता सकेंगे।
मंडी और कुल्लू जिले की सीमा पर बसे गाड़ागुशैण की खूबसूरती प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों से कम नहीं है। जिला मुख्यालय मंडी से 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गाड़ागुशैण क्षेत्र में शैटाधार, खौली, तुंगासीधार और माधोपुर गढ़ ट्रैकिंग प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जो आने वाले समय में सांस्कृतिक पर्यटन के भी अनूठे अनुभव प्रदान करेंगे। स्थानीय युवा अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से इस क्षेत्र का प्रचार-प्रसार कर दे रहे हैं।
सरकार सड़कों को सुधारे तो बढ़ेंगे पर्यटक
पर्यटन व्यवसायी युद्धवीर सिंह चौहान ने सड़क सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर सड़कों से यहां पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है। युवा मनोज कुमार ने बताया कि स्थानीय स्तर पर मड् हाउस, ईको-फ्रेंडली कॉटेज और होम स्टे बनाकर हम पर्यटकों को बेहतर अनुभव दे रहे हैं और इससे 50 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है।
गाड़ागुशैन के तहत आते अलवाह गांव में स्थानीय युवा द्वारा तैयार किया गया डुप्लेक्स हट। संवाद