मंडी। जिला न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और भू-अधिग्रहण से प्रभावित लोगों द्वारा मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत दायर 19 विभिन्न याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन दिनों एनएचएआई की ओर से चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी राजमार्गों को फोरलेन बनाने का काम किया जा रहा है।
राजमार्गों के फोरलेन निर्माण के चलते कई भू-अधिग्रहण विवाद अदालतों में लंबित हैं। इनमें से अनेकों मामलों का निस्तारण भी हो चुका है। प्रभावितों ने मध्यस्थ मंडलायुक्त न्यायाल द्वारा दिए गए अवार्ड को जिला न्यायालय में चुनौती दी थी।
एनएचएआई ने औट तहसील के राम सरन (झीडी), वीर सिंह, उर्मिला देवी, रेशमा देवी, गोविंद राम, भवानी देवी, गोपाल सिंह, ललित कुमार, येब राज, देवी रूप, योगेंद्र कुमार, भोला नाथ, हेम राज (थलौट) और सदर तहसील की बिमला देवी (सांबल), हरिश कुमार (शिल्हा कीपड़) के अवार्ड को चुनौती दी थी।
वहीं, सुंदरनगर तहसील के कनैड निवासी तवारसी देवी, छबील चंद और मुसकिन अली ने भी मध्यस्थ के अवार्ड को लेकर याचिकाएं दायर की थीं।
जिला न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों और तथ्यों के आधार पर माना कि मध्यस्थ ने अवार्ड का सही मूल्यांकन किया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि अवार्ड पूर्वाग्रह से ग्रसित या अवैध हैं। कोर्ट ने मध्यस्थ के फैसलों को बरकरार रखते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।