मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में मंगलवार सुबह कुछ हिजड़े नवजात शिशु को लेकर उपचार के लिए पहुंचे। हिजड़ों के पास नवजात शिशु कैसे आया, इसे लेकर अफरातफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन आनन फानन में हरकत में आया और पुलिस को सूचित किया। अस्पताल में मौजूद पुलिस ने तुरंत मामले में छानबीन शुरू की तो पता चला कि अभिभावकों ने खुद सहमति से ही हिजड़ों को यह नवजात सौंपा है।
दरअसल, अभिभावकों की यह सातवीं संतान है। इससे पहले दंपती की छह बेटियां हैं। बेटे की चाह में एक और संतान हुई, लेकिन वह भी बेटी हुई। इस पर दंपती ने नवजात को किसी को गोद देने की सोची। जब कोई ऐसा नहीं मिला तो उन्होंने नवजात को हिजड़ों के हवाले सौंप दिया। मंगलवार को नवजात को कुछ दिक्कत होने पर वे उसे अस्पताल जांच के लिए ले लाए। यहां हिजड़ों ने बेटी को डॉक्टर बनाने की बात कही। कहा कि वह बेटी की अच्छी पढ़ाई सुनिश्चित करेंगे और अच्छे मुकाम तक पहुंचाएंगे। मामला संज्ञान में आने पर सदर पुलिस ने जांच पड़ताल की। जांच में पाया कि नवजात को खुद माता-पिता ने हिजड़ों के पास सौंपा है।
कानूनी रूप से बच्चों को गोद लेने की एक प्रक्रिया रहती है। इसी के चलते अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी ताकि सच्चाई सामने आ सके। उधर, क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि नवजात शिशु का जन्म क्षेत्रीय अस्पताल में नहीं हुआ है। हिजड़े नवजात को कहां से लाए, क्या सही में अभिभावकों ने नवजात को हिजड़ों को दिया है, इस बारे में पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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