सुंदरनगर (मंडी)। शिक्षकों ने बच्चों के लिए घर-घर नोट्स पहुंचाने का विरोध किया है। मंगलवार को प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ ने सुंदरनगर में बैठक कर सरकार के फैसले के खिलाफ रोष व्यक्त किया। अध्यापक संघ का कहना है कि इससे शिक्षक कोरोना का शिकार हो सकते हैं। संघ ने शिक्षा विभाग से कोई भी निर्देश देने से पहले वास्तविक स्थिति जानने की गुहार लगाई है। बैठक में अध्यापकों की विभिन्न समस्याओं पर भी मंथन किया।
कोरोना के कारण बिना बिना मोबाइल ऑनलाइन पढ़ाई न कर पाने वाले गरीब बच्चों को मोबाइल देने के शिक्षा मंत्री के बयान का अध्यापक संघ ने स्वागत किया है। वर्चुअल बैठक प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। सदस्यों ने कहा कि शिक्षा मंत्री प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और बच्चों के अभिभावकों की आर्थिक स्थिति से पूरी तरह से अवगत हैं। प्रदेश में लगभग 50 प्रतिशत बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन की सुविधा नहीं है। ऐसे में वे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्ट फोन उपलब्ध नहीं करवा सकते हैं। आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग आए दिन नया प्रयोग कर रहा है। प्रतिदिन कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, उस स्थिति में शिक्षा निदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक अध्यापकों को दिशा-निर्देश दे रहे हैं कि वे नोट्स तैयार करके बच्चों के घर-घर पहुंचाएं। इससे कोरोना का खतरा बढ़ेगा। बैठक में प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग की कि किसी भी आदेश को लागू करने से पहले वास्तविक स्थिति को जान लेना चाहिए।
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पाठ्यक्रम में की जाए कटौती
सरकार से आग्रह किया कि अगर कोरोना के कारण स्कूल शुरू नहीं हो पाए तो पाठ्यक्रम में शीघ्र कटौती की जाए। इससे बच्चे वार्षिक परीक्षा की तैयारी सही तरीके से कर सकेंगे। वर्चुअल बैठक में संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुधीर चंदेल, महामंत्री अवनीश कुमार, अशोक वालिया, लवली कुमार, दिनेश पठानिया, जयसिंह ठाकुर, रणजीत कुमार, दिनेश ठाकुर, नरेश वर्मा एवं शालू परमार सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
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