मंडी (मंडी)। सुकेत की अधिष्ठात्री राजराजेश्वरी महामाया पांगणा तथा शिमला के सुन्नी तहसील के अराध्य देव शिव कामेश्वर महादेव सुनू देव रथ और पालकी पर सुशोभित होकर पांगणा के साना गांव पहुंचे।
समाजसेवी राजू, पींटु, चेतन शर्मा, श्याम लाल शर्मा, ओमादत्त ने दोनों देवरथों का स्वागत किया। पांगणा के इतिहास में पहली बार सुनु देव के साथ सुकेत अधिष्ठात्री राजराजेश्वरी महामाया पांगणा का मिलन हुआ। दोनों देव रथों का नृत्य देखने योग्य था। रात भर भजन-कीर्तन हुआ। यह क्रम रविवार तक देवी-देवताओं की विदाई तक चलेगा। शिव कालेश्वर महादेव सुनू देओ के मुख्य गूर लक्ष्मीदास कौटिल्य ने बताया कि सुनू देओ लोगों की इच्छापूर्ति करने वाले, जादू-टोना से मुक्ति करने वाले, असाध्य व्याधियों से छुटकारा दिलाने वाले देवता हैं। सुनू देवता का मंदिर शिमला जिला की तहसील सुन्नी की करियाली पंचायत के ग्राओं गांव में है।
शिव कालेश्वर महादेव का इतिहास 1000-1200 ईश्वी के बीच का है। तब भज्जी रियासत में ठाकुर और मावीं लोगों का राज था। यहीं पर देवता ने मावियों के अत्याचार से लोगों को मुक्त किया। गोपालक की सभी इच्छापूर्ति का आशीर्वाद दिया तथा गोपालक को अपना मुखिया बनाया। लक्ष्मीदास कौटिल्य ने बताया कि शिव कालेश्वर महादेव ने देश की रक्षा और विजय प्राप्ति के उद्देश्य से सोना-चांदी और एक सोने की छड़ी तैयार करके भारत रक्षा कोष के लिए दान की थी। मन्नत पूरी होने पर सोना चढ़ाने से देवता का नाम सुनू देओ पड़ा। सुनू देओ के साथ माता भीमाकाली का मोहरा भी पालकी में विराजमान है।