सराजघाटी के छतरी के देव चपलांदू नाग फर्शी (मोहरा) के साथ महाशिवरात्रि मंडी के लिए रवाना होते हुए।
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मंडी। सराजघाटी से देव चपलांदू अपने मूल स्थान से महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए वीरवार को रवाना हुए। देवता का फर्शी (लकड़ी पर स्थापित मोहरा) चार बजे देवलुुओं के साथ सराज के पनाहर गांव पहुंचेगा। इसके पश्चात देवता 25 फरवरी को जंजैहली, 26 कंडा, 27 मौवीसेरी में रात्रि ठहराव करेंगे।
28 फरवरी को बैहना में और एक मार्च को मंडी पहुंचेंगे। देवता वाहन में सवार न होकर पैदल ही चल कर प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हैं। बैहना गांव में पहुंचने के बाद देवता के रथ का शृंगार किया जाता है। इसके अलावा बैहना गांव में देव मगरू महादेव, बायला नारायण, खुड्डी जहल, देव चपलांदू नाग और देवी बायला गुसैण की कोठड़ियां मौजूद हैं।
इसमें देवताओं के रथ की साज सजावट का सामान रखा जाता है। देवता के कारदार सूरत राम ठाकुर ने बताया कि देवता महाशिवरात्रि मेले के लिए रवाना हो गए हैं। कहा कि जनपद में देवता का अहम स्थान है। देवता महामृत्युंजय मंदिर के निकट यजमान के घर में ठहरते हैं।
देवता के कारदार, पुजारी और अन्य देवलुओं के लिए स्वयं भोजन तैयार किया जाता है। सर्व देवता सेवा समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने बताया कि दूरदराज से आने वाले देवी-देवता आज भी बल्ह घाटी में आखिरी पड़ाव डालते हैं। संवाद