नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर के शिशु रोगी वार्ड में दाखिल मरीज। संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। मानसून सीजन में दूषित पानी के सेवन और खानपान पर बरती लापरवाही से जलजनित रोगों की चपेट में आए मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे स्वास्थ्य संसाधनों की भी कमी पड़ने लगी हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज टांडा और मंडी अस्पताल के लिए रेफर भी करना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर का शिशु रोगी वार्ड पूरी तरह मरीजों से भरा चुका है। पुरुष रोगी वार्ड में भी बरामदे में अतिरिक्त बैड लगाकर पीलिया मरीजों को उपचार दिलाना पड़ रहा है। इसी तरह लडभड़ोल और चौंतड़ा स्थित अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अस्पतालों में पहुंच रहे अधिकांश मरीजों में हेपेटाइटिस, डायरिया, उल्टी, दस्त, गले में खरास और तेज बुखार के लक्षण हैं।
नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर के बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक और एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि उपमंडलीय अस्पताल में करीब 100 मरीजों के दाखिले के पुख्ता प्रबंध है। इनमें 80 के करीब मरीजों को उपचार दिलाया जा रहा है। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे शिशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल में सुविधाओं और संसाधनों के विस्तार के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय महाजन ने कहा कि मानसून सीजन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को दवा के अलावा एहतियात बरतने के लिए भी सतर्क किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को उपमंडल के बड़े अस्पताल में उपचार लेने की हिदायत दी जा रही है।
नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर के शिशु रोगी वार्ड में दाखिल मरीज। संवाद