मंडी। कारीगरों को उद्यमिता विकास, मार्केट लिंकेज, डिजिटल साक्षरता, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्तीय साक्षरता और ई-कॉमर्स की बारीकियों सिखाना भविष्य की जरूरत है। पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनके कारोबार को टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने से उनकी आय में भी बढ़ाेतरी होगी।
उद्योग निदेशालय हिमाचल प्रदेश तथा एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय सोलन के संयुक्त तत्वावधान में सुंदरनगर में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत एक दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। एमएसएमई सोलन के सहायक निदेशक अभिषेक राय ने योजना की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक शिल्प कौशल के संरक्षण और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया।
राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई की नताशा कटोच ने मूल्य निर्धारण, बाजार विश्लेषण, ग्राहक जुड़ाव और टिकाऊ व्यावसायिक विकास के व्यावहारिक मंत्र साझा किए। अभय कुमार और राजसी शर्मा ने ई-कॉमर्स, एआई तकनीक, आकर्षक पैकेजिंग और व्यापक बाजार तक पहुंच बनाकर बिक्री बढ़ाने के उपाय बताए।