सुंदरनगर (मंडी)। अब किसान एक ही खेत से फसल के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। किसानों को एग्री फोटोवोल्टिक प्रणाली से जोड़ने के लिए भारतीय कृषि कौशल परिषद नई दिल्ली के सहयोग से केंद्र सरकार की विशेषज्ञ टीम ने हिमाचल प्रदेश के चंबा, मंडी और बिलासपुर जिलों में कार्यशालाएं आयोजित कर इस तकनीक की जानकारी दी।
विशेषज्ञों के अनुसार एग्री फोटोवोल्टिक प्रणाली के तहत खेतों में इस प्रकार सौर पैनल लगाए जाते हैं कि खेती और बिजली उत्पादन दोनों साथ जारी रहते हैं। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलने के साथ भूमि का बेहतर उपयोग भी संभव होता है।
दिल्ली से आए भारतीय कृषि कौशल परिषद के विषय विशेषज्ञ रिचर्ड मनु और रवि ने बताया कि यह प्रणाली खेतों में अनुकूल सूक्ष्म जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) तैयार करने में सहायक है। इससे तापमान का प्रभाव नियंत्रित रहता है, मिट्टी और पौधों से नमी की हानि कम होती है। फसलों को अत्यधिक गर्मी, भारी वर्षा और पाले जैसी परिस्थितियों से बेहतर सुरक्षा मिलती है। उचित डिजाइन वाले सौर पैनलों के नीचे पत्तेदार सब्जियां, अदरक, हल्दी और बेरी जैसी छाया सहिष्णु फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन में सुधार संभव है। किसान इससे उत्पादित बिजली का उपयोग सिंचाई और कृषि यंत्रों के संचालन में कर ऊर्जा खर्च भी घटा सकते हैं। दूरस्थ और ग्रिड से वंचित क्षेत्रों में यह तकनीक स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एग्री फोटोवोल्टिक परियोजनाएं व्यक्तिगत किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियां, पंचायतें, जल उपयोगकर्ता समितियां, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां और निजी डेवलपर्स भी स्थापित कर सकते हैं।
क्या है एग्री फोटोवोल्टिक प्रणाली
कृषि-सौर ऊर्जा प्रणाली में एक ही भूमि पर कृषि उत्पादन और सौर ऊर्जा उत्पादन एक साथ किया जाता है। सौर पैनलों को इस प्रकार स्थापित किया जाता है कि फसलों को आवश्यक धूप मिलती रहे और साथ ही बिजली का उत्पादन भी होता रहे। इससे भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ती है और किसानों को खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन से भी आय प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
-डॉ. पंकज सूद, कृषि विज्ञान केंद्र, सुंदरनगर