सरकाघाट (मंडी)। सरकाघाट नगर मुख्यालय में एक ओर जहां आधा दर्जन दुकानों का आवंटन बीते तीन वर्षों से नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी और गरीब परिवारों से संबंधित युवाओं को स्वरोजगार से वंचित रहना पड़ रहा है।
वर्ष 2002 में बेरोजगार युवाओं तथा अन्य स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामग्री को बेचने के लिए दस लाख रुपये की स्वीकृत राशि से दुकानों के निर्माण कार्य की प्रक्रिया ने जोर पकड़ा था। अप्रैल, 2003 को तत्कालीन आबकारी एवं कराधान मंत्री ने इसका शिलान्यास भी किया था। युवाओं को स्वरोजगार प्रदान करने के लिए सात दुकानों का निर्माण किया जाना था। जबकि स्वीकृत योजना के तहत इन दुकानों का आवंटन अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंध रखने वाले युवाओं तथा बीपीएल परिवारों को महज चार सौ रुपये प्रतिमाह किराये पर किया जाना था।
वर्ष 2006 में बन कर तैयार हो चुकी इन दुकानों का आवंटन अभी तक पात्र लोगों को नहीं किया जा सका है। साल 2009 से दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू है। सातों दुकानों के शटरों में ताले लटके हैं। इससे सरकार को भी भारी चूना लग रहा है। इधर, क्षेत्र निवासी कर्म सिंह, श्याम लाल, राम सिंह, लता देवी, रेशमां, सुभाष आदि का कहना है कि इन दुकानों के आवंटन से गरीब लोगों को रोजगार मिलना था।
इधर, इस बारे में बीडीओ गोपालपुर अंकुश वर्मा का कहना है कि मामले की छानबीन करके जल्द दुकानों का आवंटन कर दिया जाएगा। उन्हें यहां कार्यभार संभाले अभी एक सप्ताह ही हुआ है।