कुल 15 याचिकाएं खारिज कर अदालत ने मध्यस्थ का अवार्ड रखा बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के फोरलेन निर्माण के लिए भूमि और भवन अधिग्रहण से जुड़े 15 मुआवजा मामलों में सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इनमें एनएचएआई की 6 और 9 भूमि मालिकों की याचिकाएं शामिल थीं। अदालत ने मध्यस्थ की ओर से पारित पुरस्कारों को बरकरार रखा। ये याचिकाएं मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत दायर की गई थीं। मामले के अनुसार वर्ष 2015-16 में नेरचौक-मनाली खंड पर राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के चौड़ीकरण के लिए मंडी और कुल्लू क्षेत्रों में भूमि और भवन अधिग्रहण किए गए। सक्षम प्राधिकारी ने 2016-18 के दौरान मुआवजा राशि तय की, लेकिन कुछ पक्ष इससे असंतुष्ट होकर राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3जी (5) के तहत मध्यस्थ के समक्ष दावा दायर कर दिया।
मध्यस्थ सह मंडलायुक्त मंडी ने सुनवाई के बाद कुछ भूमि मालिकों को बढ़ा हुआ बाजार मूल्य, 2013 के अधिनियम के तहत वैधानिक लाभ तथा पहले वर्ष के लिए 9 प्रतिशत और उसके बाद 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के आदेश दिए। कुछ मामलों में संरचनाओं के मूल्यांकन को यथावत रखते हुए वैधानिक लाभ प्रदान किया गया।
एनएचएआई ने मध्यस्थ के आदेशों को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि मध्यस्थ ने कानून के दायरे से बाहर जाकर लाभ दिए हैं, जबकि भूमि मालिकों ने मूल्यांकन को अपर्याप्त बताया। जिला न्यायाधीश ने सभी दलीलों के बाद स्पष्ट किया कि धारा 34 के तहत न्यायालय का हस्तक्षेप सीमित है। केवल असहमति या पुनर्मूल्यांकन के आधार पर मध्यस्थ पुरस्कार को निरस्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने पाया कि मध्यस्थ के आदेशों में कोई स्पष्ट विधिक दोष नहीं है और इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।