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जिला पुस्तकालय मंडी में सुविधा न मिलने से भड़के सैंकड़ों विद्यार्थी सड़कों पर उतरे

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जिला लाईब्रेरी में असुविधाओं के चलते पैदल मार्च करते पाठक, छात्र व छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
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मंडी। जिला लाइब्रेेरी में असुविधाओं से जूझ रहे युवाओं की न प्रशासन ने सुनी न ही सरकार ने। नतीजतन वीरवार को लाइब्रेरी में पढ़ने वाले युवाओं ने शहर में पैदल मार्च कर आक्रोश जताया। रैली की शक्ल में युवाओं ने सांसद राम स्वरूप को ज्ञापन सौंपा। युवाओं का कहना है कि डीसी कार्यालय के समीप जिला मुख्यालय की लाइब्रेरी में न तो बैठने के लिए पर्याप्त जगह है और न ही साफ-सफाई। पानी की बेहतर सुविधा का प्रावधान भी नहीं है। शौचालयों में भी ताले लटके होते हैं। ऊपर से लाइब्रेरी से बाहर शोर से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को परेशानी होती है। इस संदर्भ में युवा और विद्यार्थी प्रशासन और सरकार से गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी गुहार को अनदेखा किया गया है। इसके चलते जिला पुस्तकालय से रोष पैदल मार्च निकाला गया। परिधि गृह में सांसद रामस्वरूप शर्मा को मांग पत्र सौंपा गया। सांसद ने भी मामले में अनभिज्ञता जाहिर की और समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।
महोदय किताबें तो हजारों दीं पर बैठें कहां
इस दौरान सांसद ने कहा कि हाल ही में पचास हजार की किताबें दीं तो एक युवक भीड़ के बीच में से बोल उठा। महोदय किताबें तो हजारों हैं बस पढ़ने के लिए जगह नहीं है। करीब 60 हजार पुस्तकों की क्षमता वाले जिला पुस्तकालय में बैठने के लिए महज 120 कुर्सियां और कुछ टेबल हैं। यहां पर पंजीकृत युवाओं की संख्या ढाई हजार से पार है। सुविधाओं के नाम पर हालात यह है कि पुस्तकालय में महिला शौचालय के वॉसवेशन से पानी भरा जाता है। इस पानी को पीने की बजाए पुस्तकालय में स्टडी के लिए पहुंचने वाले विद्यार्थी घर से पानी की बोतल लेकर आते हैं। 24 घंटे लाइब्रेरी को खुला रखने की मांग पर एक प्रशासनिक अधिकारी बोले, यदि पढ़ना ही है तो घर पर पढ़ लो लाइब्रेरी आने की जरूरत क्या है।
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युवाओं की मुख्य मांगों में लाइब्रेरी के गेट से नोटरी और लिपिकों को हटाना, ताकि बेवजह का शोर न हो, 24 घंटे लाइब्रेरी खुली रखने और पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था करने, लाइब्रेरी के लिए नया स्थान ढूंढने, कुर्सियों और टेबल की क्षमता बढ़ाने, विजय हाई स्कूल के कार्य में तेजी लाने और यहां पर रीडिंग रूम बनाने जैसी मांगें शामिल हैं।
महिला शौचालय से पीने की पानी की व्यवस्था : सोनू
मंडी के सोनू का कहना है कि पुस्तकालय में तो पीने के लिए पानी की व्यवस्था भी महिला शौचालय के वॉसवेशन में है। बेहद शर्मनाक है कि पढ़ने के लिए बैठने का प्रबंधन नहीं और स्वच्छता के मानकों के नाम पर शौचालय का पानी। प्रशासन का रवैया जरा सही नहीं है। अरसे से कई बार अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद समस्या जस की तस है।
पुस्तकालय के गेट से शुरू हो जाती है समस्या : चेतन
युवा चेतन शर्मा का कहना है कि पुस्तकालय के अंदर की समस्या तो बाहर से शुरू हो जाती है। यहां बैठे नोटरी के टाइपराइटर की आवाज और काम के लिए पहुंचे लोगों का शोर भारी परेशानी करता है। इन्हें कहीं और जगह दी जानी चाहिए।
चौबीस घंटे खुली रहे लाइब्रेरी : खेमराज
ज्वालापुर निवासी खेमराज का कहना है कि लाइब्रेरी को 24 घंटे खोला जाना चाहिए लेकिन, जिला प्रशासन के बड़े साहब मांग बताने पर कहते हैं कि पढ़ाई ही करनी है तो घर पर ही कर लो। तो फिर पुस्तकालयों का मतलब क्या रह गया।
पुस्तकालय में नहीं मिलती कुर्सी : निशा
सरकाघाट निवासी निशा का कहना है कि परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए मंडी में किराए पर कमरा लिया है। लेकिन, पुस्तकालय में बैठने के लिए कुर्सी तक नसीब नहीं होती है। कुर्सियों और टेबल की व्यवस्था जरूरी है।
लाइब्रेरी में साइलेंट जोन होना जरूरी : भारती
गोहर निवासी भारती ठाकुर का कहना है कि लाइब्रेरी साइलेंट जोन में होनी चाहिए। यहां पर दिनभर गेट पर लोग उलझते रहते हैं। पढ़ाई में बेहद परेशानी आती है। प्रशासन को इसका स्थायी समाधान करना चाहिए।
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विजय हाई स्कूल में शिफ्ट हो रीडिंग रूम : करुणा
बगस्याड़ निवासी करुणा ठाकुर ने कहा कि विजय हाई स्कूल में चल रहे कार्य में तेजी लाई जानी चाहिए ताकि, यहां पर रीडिंग रूम शिफ्ट कर पढ़ने के लिए कम से कम साइलेंट जोन की व्यवस्था हो।
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