बालीचौकी (मंडी)। देव संस्कृति से समृद्ध छोटी काशी मंडी के सराज में जहां हर देवता अपने गूर का चयन खुद करते हैं वहीं, बालीचौकी क्षेत्र के गढ़पति ईश्वर महादेव रिश्ते में अपने भाई देवों के गुर का चयन करते हैं। देव गढ़पति ईश्वर महादेव रिश्ते में भाई देव लक्ष्मी नारायण, जम्मलु, शेष नाग, कांढे नाग का चयन करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। करीब 20 वर्ष बाद पलाईच क्षेत्र के लोग इस देव कारज का गवाह बने। बालीचौकी क्षेत्र की ग्राम पंचायत पलाईच के आराध्य देवता ईश्वर महादेव और कलबारी के देवता लक्ष्मी नारायण का 20 वर्ष बाद वीरवार को भव्य मिलन हुआ। कलबारी के देवता लक्ष्मी नारायण गूर के चयन के लिए गढ़पति ईश्वर महादेव के दरबार जम्मद कोठी पहुंचे। बीस वर्ष पहले जब देवता लक्ष्मी नारायण पलाईच आए तो दोनों देवताओं के देवलुओं के बीच चल रहे विवाद के कारण दोनों देवताओं ने अपने क्रोध के कारण पूरे सराज क्षेत्र में ओलों की बारिश कर दी थी। जिसका खामियाजा पूरे क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ा था और किसानों और बागवानों की फसलें भी पूरी तरह से प्रभावित हो गई थीं।
गूर के चयन में लगता है तीन दिन का समय
गढ़पति ईश्वर महादेव के गूर भाग सिंह ने कहा कि ईश्वर महादेव की ओर से लक्ष्मी नारायण के गूर का चयन आधार यह है कि देव ईश्वर महादेव क्षेत्र के गढ़पति हैं। गूर की चयन प्रक्रिया में तीन दिन का समय लगता है।
क्या है दोनों देवताओं का संबंध
देवलुओं में गुम्मत राम, शेरे के गूर संजय ठाकुर ने कहा कि देव गढ़पति ईश्वर महादेव का देव लक्ष्मी नारायण से भाई का नाता है। कहा जाता है कि देव जम्मलु, शेष नाग, कांढे नाग भी देव गढ़पति शिव के भाई हैं। इन देवताओं के गूर का चयन भी गढ़पति ईश्वर महादेव करते हैं।