गोहर (मंडी)। मंडी जिले में गेहूं की फसल सूखे की चपेट में तबाही के कगार पर है। अब तक के आंकड़ों की ओर अगर देखा जाए तो मंडी जिले के 10 ब्लाकों में करीब 60 फीसदी गेहूं की फसल सूखे की चपेट में आने से नष्ट होने को तैयार हो चुकी है। रबी सीजन में गेहूं की खेती पर सूखे की मार पड़ने से किसानों की कमर टूट गई है। निरंतर सूखा पड़ने से गेहूं को पहुंच रहा नुकसान ज्यादा होता जा रहा है, जिससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। सूखे का प्रकोप यही रहा तो किसानों की साल भर की रोजी रोटी के लिए किसानों को रोटी बनाने के लिए आटे के लाले पड़ सकते हैं। जिले में बारिश पर निर्भर रहने वाले हजारों किसान साल भर की रोजी रोटी के लिए तरस सकते हैं। इस बार तीन माह से बूंदाबांदी न होने के कारण किसानों की कमर टूट गई है। हालांकि, पिछले दिनों बारिश हुई थी मगर पर्याप्त नमी से फसल पर संकट बरकरार है। मौसम की बेरुखी से इस बार रबी सीजन का ढांचा डगमगा गया है।, वहीं दूसरी ओर सेब के बगीचों में भी बारशि न होने से आने वाली फ्लावरिंग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे बागवान चिंतित हो उठे हैं। कृषि विभाग के अनुसार मंडी जिले में 80 फीसदी गेहूं की बिजाई 15 नवंबर से पहले हो चुकी है, जिसमें 60 फीसदी गेहूं सूखे के कारण तबाह होने के कगार पर है। किसानों ने बताया कि निकट भविष्य में उन्हें रोजी रोटी के लाले पड़ सकते हैं। मंडी जिले में बारिश के लिए बड़ा देव कमरूनाग की शरण में किसान और बागवान जाने का मन बना रहे हैं, लेकिन मगर देवता बारिश बरसाने के मूड में नहीं है।
जिले में दस ब्लाकों में की जाती है गेहूं की बिजाई
जिले में गोहर, सराज, बल्ह, सदर, द्रंग, गोपालपुर, धर्मपुर, चौंतड़ा, करसोग और सुंदरनगर ब्लॉकों में किसानों ने गेहूं की बिजाई की है। इन सभी ब्लॉकों में सूखा पड़ने से किसानों की हालत पतली हो गई है और किसान बारिश मांगने के लिए देवताओं की शरण में है।
जनपद में रबी सीजन में 64 हजार हैक्टेयर भू भाग में गंदम की बिजाई की जाती है। करीब चार माह बीत चले हैं लेकिन बारिश का नाम तक नहीं है। किसानों के लिए सूखा गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। बारिश न पड़ने से सूखे के कारण में जिले में गेहूं की करीब 60 फीसदी फसल तबाही के कगार पर है। बारिश न हुई तो सूखे से फसलों को हो रहे नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है। रूप लाल चौहान, उपनिदेशक कृषि विभाग मंडी।