दिन वीरवार और समय सुबह के 9 बजे। जगह पड्डल मैदान मंडी। सुबह 9 बजे धूप हल्की-हल्की निकल रही थी और तभी मंडी की सड़कों पर झंडे, ढोल, पारंपरिक वाद्ययंत्र और रंगीन पहाड़ी परिधानों में सजे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पदयात्राएं तेज हो गईं। कोहरे में लिपटा शहर देखते ही देखते रैली की ऊर्जा से सराबोर हो गया। 10 बजे सम्मेलन जैसे ही शुरू हुआ, मंडी से लेकर कुल्लू, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर तक से आए लोग लगातार मैदान में दाखिल होते रहे। मंच पर नारे, मैदान में तालियां और बाहर की सड़कों पर हुजूम… रैली का माहौल हर मिनट चढ़ता गया।
12 बजे तक कुर्सियां भर चुकी थीं। सीढ़ियां भी भर गईं। लोग खुले मैदान में बैठ गए। संकल्प सम्मेलन से पहले लोगों के लिए चावल, रोटी, सब्जी, दही और जूस के पैकेट बांटे गए। शहर के ढाबे, रेस्तरां, यहां तक कि महामृत्युंजय चौक की कचौरी और मंडी के सिड्डू तक की दुकानों पर भीड़ हाथों हाथ टूट पड़ी। सेल्फी प्वाइंट पर लोग सेल्फियां ले रहे थे और सोशल मीडिया पर लाइव कर रहे थे। मंडी शहर मानो एक उत्सव में तब्दील हो गया हो।
जब भीड़ अपने चरम पर थी, करीब 12:30 बजे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मंच पर पहुंचे और तभी माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंग गया। भाजपा के गढ़ मंडी से कांग्रेस ने विपक्ष को खुली चुनौती दे दी। सीएम सुक्खू ने कहा कि यह सिर्फ उपलब्धियों का उत्सव नहीं, यह व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई का संकल्प है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भाजपा सांसद की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने 2027 चुनाव पर खुलकर अपील की। उन्होंने कहा - गारंटियों का वादा भूले नहीं हैं, पूरा होगा। कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने एकजुटता का संदेश देकर रैली को रणनीतिक मजबूती दी। उल्लेखनीय है कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव की पहली चुनावी हुंकार की शुरुआत मंडी से हो चुकी है।