इसके बाद देव कोटलू नारायण, देव सरोली मार्कंडेय, देव शैटी नाग, देवी डाहर की अंबिका, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग, श्रीदेव बायला नारायण, देव बिटठु नारायण, देव लक्ष्मी नारायण पखरोल, चौहारघाटी के देव हुरंग नारायण, देव घड़ौनी नारायण, देव पशाकोट नारायण, देव पेखरू का गहरी, देव चुंज वाला शिव, देव तुंगासी ब्रह्मा समेत अन्य देवी-देवता सैकड़ों देवलुओं के साथ शामिल हुए। इसके पश्चात राज देवता माधो राय की चांदी की कुर्सी और पालकी निकाली गई। इनके पीछे देव शुकदेव डघांढु, देव शुकदेव मड़घयाल, देव जलौणी गणपति, देव शेषनाग टेपर, देव झाथीवीर और देव टुंडी वीर शामिल रहे। सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने बताया कि जलेब में देवी-देवताओं ने निर्धारित क्रम के अनुसार भाग लिया और प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन किया गया।