आपदा के तुरंत बाद सरकार और नेताओं ने प्रभावितों से मुलाकात कर जल्द सुरक्षित जमीन देने का आश्वासन दिया था लेकिन तीन महीने बाद भी जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब वे अपने ढहे हुए घरों को देखते हैं तो आंखों से आंसू थमते नहीं।
गांव की आपदा समिति की सचिव नीलम कुमारी और सदस्य स्निचरू, डमणु राम, धनीराम, हलकु राम, गुरदीता, विशाल, रजनीश, देशराज, संतोष कुमार, ब्रह्मदास, रवि कुमार, दीप कुमार, संजय कुमार, जय सिंह, कृष्ण चंद, अशोक कुमार, ललित और कर्मदास का कहना है कि हम अपने घरों में हंसी-खुशी रहते थे पर अब सब कुछ खत्म हो गया। भगवान की मर्जी को कोई रोक नहीं सकता लेकिन सरकार हमारी मदद कर सकती है। मांग सिर्फ इतनी है कि हमें सुरक्षित जगह पर बसाया जाए ताकि फिर ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
लौंगणी पंचायत की प्रधान मीना देवी, उपप्रधान पृथी सिंह और पूर्व प्रधान देशराज पालसरा ने भी प्रभावित परिवारों की पीड़ा सरकार तक पहुंचाई है। उनका कहना है कि लोग महीनों से किराये के मकानों में रह रहे हैं। इसलिए जल्द से जल्द इन्हें जमीन आवंटित की जाए ताकि वे अपने नए घर बना सकें।
आपदा के बीच सब कुछ छूट गया है। अब किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन और शासन से यही आग्रह है कि तुरंत सुरक्षित जमीन दी जाए। -
ललित कुमार, प्रभावित
एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाया था। इस त्रासदी ने सब कुछ तबाह कर दिया है। सरकार पर आश्रित हैं कि कब जैसे जमीन मिलेगी। - हलकु राम, प्रभावित
स्याठी गांव की तरफ देखते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। इस गांव में लंबा अरसा बीता है। सभी ग्रामीणों को एक सुरक्षित जगह पर सरकार बसाए। - राजो देवी, प्रभावित
त्रासदी ने हंसती खेलती जिंदगी में सब कुछ उथल-पुथल कर दिया है। कभी नहीं सोचा था कि दर-दर ठोकरें खानी पड़ेंगी। सरकार से जमीन मिलने की उम्मीद है।-
जुलमी देवी, प्रभावित
प्रभावितों को पुनर्वासित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। एफआरसी कमेटी से जमीन की स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्यवाही उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। प्रशासन प्रयासरत है कि जल्द इस कार्य को पूरा किया जाए। -जोगिंद्र पटियाल, एसडीएम धर्मपुर