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मनाली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चखा पहाड़ का देसी स्वाद, रात में गुच्छी-लाल चावल तो सुबह कुट्टू के पराठे

Wed, 07 Oct 2026 07:45 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मनाली/नग्गर (कुल्लू)।

सार

रात के भोजन में जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी की सब्जी, लाल चावल और राजमा परोसे गए। बुधवार सुबह नाश्ते में कुट्टू के आटे के परांठे के साथ काउनी, ओघला और बेसा से तैयार सूप शामिल रहा।
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माता हिडिंबा मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल सहित अन्य। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मनाली प्रवास के दौरान उन्हें हिमाचली संस्कृति, परंपरा और स्थानीय खानपान की विशेष झलक देखने को मिली। प्रशासन ने राष्ट्रपति के लिए कुल्लू घाटी के पारंपरिक व्यंजनों से सजा विशेष मेन्यू तैयार किया था। मंगलवार रात के भोजन में जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी की सब्जी, लाल चावल और राजमा परोसे गए। बुधवार सुबह नाश्ते में कुट्टू के आटे के परांठे के साथ काउनी, ओघला और बेसा से तैयार सूप शामिल रहा। दोपहर के भोजन में बाथू की खीर, कच्चे पपीते और खुमानी का मीठा परोसा गया। इसके अलावा तोरी, भिंडी, गुच्छी और रागी का सूप तथा कद्दू आंवले की सब्जी भी मेन्यू का हिस्सा रही। इस पहल के माध्यम से प्रशासन ने कुल्लू की पारंपरिक खानपान संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत किया।

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 राष्ट्रपति की बेटी ने रोरिक आर्ट गैलरी में निहारीं हिमालय की चित्रकृतियां
 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बेटी इतिश्री मुर्मू ने बुधवार को नग्गर स्थित प्रसिद्ध निकोलस रोरिक आर्ट गैलरी का भ्रमण किया। उन्होंने रूसी चित्रकार एवं दार्शनिक निकोलस रोरिक की ओर से बनाए गए हिमालय के चित्रों और कलाकृतियों को देखा तथा उनकी कला की सराहना की। इस दौरान उन्होंने परिसर में फोटोग्राफी भी की। इतिश्री मुर्मू ने रोरिक परिवार के ऐतिहासिक निवास का भी अवलोकन किया, जिसे अब धरोहर संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया गया है। उन्होंने संग्रहालय में रखी दुर्लभ ऐतिहासिक सामग्री और रोरिक परिवार की पुरानी विंटेज कार को भी देखा। कुल्लू-मनाली घाटी की सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण से वह प्रभावित नजर आईं। संग्रहालय की क्यूरेटर डॉ. लारिसा सुरगीना ने उन्हें रोरिक की चित्रकृतियों और उनके जीवन से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निकोलस रोरिक वर्ष 1928 में परिवार के साथ नग्गर आए थे और हिमालय से प्रेरित होकर अनेक चित्र बनाए।
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