सुमित ने बताया कि वर्ष 2021 में एचपीयू से पीएचडी के दौरान उन्होंने इस अवधारणा पर काम शुरू किया था, जिसे एनआईटी के तकनीकी सहयोग से व्यावहारिक रूप दिया गया। डिवाइस में लगे एआई सेंसर सबसे पहले दूध का रियल टाइम विश्लेषण करेंगे। यदि दूध में यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक फैट या अन्य संदिग्ध तत्व पाए जाते हैं तो डिवाइस का विशेष मेम्ब्रेन फिल्टर स्वतः सक्रिय हो जाएगा। यह फिल्टर केवल दूध के आवश्यक घटकों को अपने भीतर से गुजरने देगा, जबकि मिलावटी और हानिकारक तत्वों को अलग कर देगा। पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी होगी और उपभोक्ता को अपेक्षाकृत अधिक शुद्ध दूध उपलब्ध होगा।
10 हजार रुपये तक लाने का लक्ष्य
फिलहाल प्रोटोटाइप तैयार करने में करीब 35 हजार रुपये की लागत आई है, लेकिन डेवलपर्स का दावा है कि औद्योगिक स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद इसकी कीमत घटाकर करीब 10 हजार रुपये तक लाई जा सकेगी। उनका लक्ष्य ऐसा घरेलू प्यूरीफायर विकसित करना है, जिसे मध्यमवर्गीय परिवार भी आसानी से खरीद सकें।
घर से लेकर डेयरी तक होगा इस्तेमाल
लेक्टो प्योर का छोटा मॉडल घरेलू उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जो करीब 10 मिनट में एक लीटर दूध को शुद्ध करने में सक्षम होगा। वहीं, बड़े डेयरी संयंत्रों के लिए उच्च क्षमता वाले फिल्ट्रेशन सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे एक साथ सैकड़ों लीटर दूध की शुद्धि की जा सकेगी। इससे डेयरी उद्योग को भी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इनक्यूबेशन सेंटर का प्रयास है कि शोध और नवाचार को बाजार तक पहुंचाया जाए। लेक्टो प्योर ऐसा नवाचार है, जिसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है। इसे व्यावसायिक रूप देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. पमिता अवस्थी, प्रभारी, इनक्यूबेशन सेंटर, एनआईटी हमीरपुर