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Kullu News: जहां बाढ़ ने लूट ली जमीन, वहां मनरेगा बोएगा जीवन

Sun, 14 Sep 2025 10:54 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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कुल्लू में अब मनरेगा के तहत किया जाएगा बाढ़ नियंत्रण और भूमि का विकास कार्य
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नग्गर विकास खंड के रिहायशी इलाकों में ब्यास के किनारे क्रेटवायर लगाने से हुई शुरुआत

आपदा के वक्त मनरेगा में दी राहत, ग्राम सभा से शेल्फ को मंजूर करवाने की जरूरत नहीं
बलदेव राज
कुल्लू। बाढ़ आई, खेत बहे, दीवारें गिरीं लेकिन अब राहत उन हाथों में है जिन्होंने इस जमीन को बनाया था। मनरेगा अब सिर्फ मजदूरी का जरिया नहीं, बल्कि आपदा राहत का हथियार बन चुका है।
नग्गर ब्लॉक में ब्यास नदी के किनारे 15 मील से शुरू हुई क्रेटवायर लगाने की मुहिम ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। अब बिना ग्राम सभा की लंबी प्रक्रिया के सीधे पंचायत के माध्यम से आवेदन संभव है ताकि देरी नहीं, राहत पहले पहुंचे।
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जिले में बाढ़ और भूस्खलन से करोड़ों की क्षति हुई है। मनरेगा के तहत बाढ़ नियंत्रण कार्य और विकास कार्य किए जाएंगे। नग्गर विकास खंड के रिहायशी इलाकों में ब्यास नदी के किनारे क्रेटवायर लगाने से इसकी शुरूआत हो गई है।
आपदा को देखते हुए सूबे में मनरेगा में राहत दी गई है। भूमि विकास कंपोनेंट के तहत सरकार की ओर से दो लाख रुपये की राशि दी जाएगी। अगर किसी का खेत गिर गया है तो आवेदक शेल्फ को मंजूर करवाकर इस काम को करवा सकता है। सरकार ने आपदा को देखते हुए मनरेगा में यह राहत दी है कि जब तक आपदा चल रही है, तब तक शेल्फ को ग्राम सभा से मंजूर करवाने की आवश्यकता नहीं है। आवेदक सीधे तौर पर अपना आवेदन ग्राम पंचायत के पास कर सकता है। पंचायत के माध्यम से यह संबंधित खंड विकास अधिकारी के पास जाएगा। खंड विकास अधिकारी से कंपाइल होकर आवेदनों को उपायुक्त के पास भेजा जाएगा। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्राधिकरण अध्यक्ष से मंजूर होने के बाद इसे खंड विकास अधिकारी के पास भेजा जाएगा। मंजूरी के आधार पर मनरेगा का कार्य किया जा सकेगा।


मनरेगा के तहत 15 मील में ब्यास नदी के किनारे क्रेटवायर लगाने का काम किया जा रहा है। भूमि के विकास के कार्य भी मनरेगा में किए जाएंगे। मनरेगा के तहत होने वाले कार्याें से लोगों को लाभ मिलेगा। - मुकेश कुमार, खंड विकास अधिकारी, नग्गर
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बगीचों और खेतों में हुआ नुकसान
मानसून के दौरान इस बार अधिक बारिश से खेतों और बगीचों का काफी अधिक नुकसान हुआ है। भूमि सुधार कार्य से किसान और बागवान अपने नुकसान को कम कर सकेंगे। कुल्लू, मनाली, बंजार और आनी उपमंडल में ही कई घरों के आगे डंगे लगाने की आवश्यकता है।
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