इनर अखाड़ा बाजार में भूस्खलन की मार झेल रहे प्रभावितों के लिए पड़ोसियों ने खोले द्वार
सनातन धर्म-सत्संग सभा और गुरुद्वारा साहिब ने ठिकाना देने के साथ किया खाने का इंतजाम
गौरीशंकर
कुल्लू। इनर अखाड़ा बाजार में भूस्खलन की मार झेल रहे प्रभावितों के लिए इंसानियत की मिसाल कायम हो रही है। एक ओर मकान गिर रहे हैं, दूसरी ओर समाज के दरवाजे खुल रहे हैं।
सत्संग सभा, सनातन धर्म सभा और गुरुद्वारा साहिब ने न सिर्फ अपने भवन शरणार्थियों के लिए खोले, बल्कि रहने और खाने का पूरा इंतजाम भी किया। पड़ोसी भी पीछे नहीं रहे, बुजुर्गों और बच्चों वाले परिवारों के लिए अपने घरों के कमरे खोल दिए। प्रशासन ने भी राहत शिविर स्थापित कर प्रभावितों को सुरक्षित छत और भोजन मुहैया करवाया है। संकट की इस घड़ी में कुल्लू ने एकजुट होकर दिखाया कि जमीन चाहे खिसक जाए, इंसानियत की नींव अडिग रहती है।
संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि आपदा की घड़ी में वे प्रभावितों के साथ हैं। प्रभावित उनके भवनों में रह सकते हैं। दनके खाने-पीने का प्रबंध किया जा रहा है। गुरुद्वारा साहिब अखाड़ा बाजार में भी प्रभावित शरण लेने पहुंचे हैं। यहां भी उनके ठहरने और खाने की व्यवस्था की गई है।
... हर कोई निभा रहा मानवता का फर्ज
संस्थाओं के साथ पड़ोसियों ने भी प्रभावित परिवारों के लिए अपने घरों के कमरे खोल दिए हैं। खासकर उन परिवारों के लिए कमरे खोले हैं जिनके पास बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। हर कोई मानवता का फर्ज निभाता दिखाई दे रहा है। प्रभावित चाहे किरायेदार हों या मकान मालिक हो, सिर्फ अपना जरूरी सामान लेकर ही घर से निकल रहे हैं।
... राहत शिविर भी बने प्रभाविताें का ठिकाना
संस्थाओं और पड़ोसियों के साथ प्रशासन ने भी सरकारी तौर पर राहत शिविर लगाए हैं। नगर परिषद ने अखाड़ा बाजार, सुल्तानपुर क्षेत्र में राहत शिविर लगाए हैं। इनमें प्रभावित परिवारों को ठहराया जा रहा है। शिविरों में अखाड़ा बाजार, सुल्तानपुर और लोरन आदि क्षेत्रों से मकान खाली करने वाले परिवारों और किरायेदारों को ठहरने के लिए जगह दी गई है। प्रशासन ने इनके खाने का इंतजाम भी किया है।
अखाड़ा बाजार और शहर के अन्य क्षेत्रों क्षेत्र से मकान खाली करने वाले परिवारों को ठहराने के लिए शहर में सरकारी तौर पर राहत शिविर लगाए गए हैं। यहां उनके ठहरने और खाने की व्यवस्था की गई है। - हरि सिंह यादव, तहसीलदार कुल्लू