मनाली, आसपास के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लोगों ने केंद्रीय राज्य मंत्री को सुनाया दुखड़ा
लोग बोले- घर धंस गए तो बनते रहे एक-दूसरे का सहारा, मलबे से भर गए थे मकान
सावित्री ठाकुर ने प्रभावितों से बातचीत कर दिया रिपोर्ट पीएम तक पहुंचाने का भरोसा
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। पर्यटन नगरी मनाली में जब जमीन फटी तो घर धंस गए लेकिन हौसले टिके रहे। सरकार भले देर से पहुंची मगर लोग एक-दूसरे का सहारा बनते रहे। शनिवार को केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने दौरा किया।
मनाली और आसपास के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में लोगों ने उन्हें न सिर्फ टूटी हुईं दीवारें, बल्कि टूटी हुई उम्मीदें भी दिखाईं। लोगों ने कहा कि कंधों पर फावड़े उठाकर हाथों से हटाया मलबा। जब कोई नहीं आया, तब गांव वालों ने खुद ही अपने रास्ते बनाए। आपदा के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने मंत्री हिमाचल भेजे हैं। शनिवार को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने मनाली के आपदा ग्रस्त इलाकों का दौरा कर लोगों का दर्द जाना। उन्होंने समाहण, वशिष्ट, पलचान, बाहंग, सोलंग गांव और ओल्ड मनाली क्षेत्र में नुकसान का जायजा लिया।
समाहन के निवासियों ने पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आपदा में उनके घर मलबे से भर गए। किसी ने मदद नहीं की। आपस में मिल-जुलकर मलबा निकाला। सोलंगनाला के देवीचंद ने कहा कि उनका घर ढह गया है। ब्यास नदी का खारा लगने से पहाड़ी धंस रही है। पूरा गांव खतरे में है। नदी के साथ आरसीसी की दीवार लगने से समस्या हल हो सकती है। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें पूरी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपने का आश्वासन दिया। केंद्र से हर संभव मदद का भी भरोसा दिया।
समीक्षा बैठक में रखा नुकसान का ब्योरा
केंद्रीय मंत्री ने परिधि गृह मनाली में प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें एसडीएम, बीआरओ, एनएचआई, लोक निर्माण विभाग, विद्युत बोर्ड और जलशक्ति विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में आपदा से हुए नुकसान का ब्योरा रखा गया। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा से कई स्थानों पर सड़कों और रास्तों को नुकसान पहुंचा है जबकि लोगों की निजी जमीनें और मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित इलाकों में हुए नुकसान की विस्तृत आकलन रिपोर्ट तैयार करें। पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर भी उनके साथ मौजूद रहे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री के समक्ष मामला उठाया कि मनालसु नाला और ब्यास का तटीकरण जरूरी है।