कुल्लू में सेब सीजन के दौरान पैकिग करने में जुटे पैकर।
- फोटो : Kullu
कुल्लू। सब्जी मंडियों में 20 किलो क्रेट पर छह से आठ रुपये मजदूरी बागवानों से वसूली जा रही है। सब्जी मंडियों में एचपीएमसी और प्रशासन की ओर से लेबर चार्ज तय नहीं किया गया है। ऐसे में 50 किलो सीमेंट की बोरी पर लिए जाने वाले पांच रुपये मजदूरी से अधिक चार्ज तो बागवानों देना पड़ रहा है। इसका सीधे तौर पर बागवानों को नुकसान हो रहा है।
मंडियों में आढ़तियों की ओर से बागवानों से प्रति क्रेट मजदूरी ली जाती है। इसके अलावा बागवानों को प्रति क्रेट किराया, तुड़ान और ढुलान आदि पर भी पैसा खर्च करना पड़ता है। इस बार बारदाना और कार्टन के दाम भी बढ़े हैं। कोरोना के बीच बागवानों के पल्ले कुछ भी नहीं पड़ रहा है। गौर रहे कि चार दिन पहले सेब सीजन की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन के साथ आयोजित बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। फलोत्पादक मंडल ने इस पर कड़ा संज्ञान लेने को कहा था। लेकिन अभी तक फलोत्पादक मंडल ने कुछ नहीं किया है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सीमेंट की 50 किलो की बोरी पर मजदूरी तय की हुई है। इस पर पांच रुपये के हिसाब से मजदूरी ली जाती है। लेकिन 20 किलो की क्रेट पर मजदूरी छह से आठ रुपये तक ली जा रही है। हालांकि क्रेट का वजन सीमेंट की बोरी से कम होता है। इससे सैकड़ों बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि बैठक में मुद्दा आया है। बारदाना से लेकर अन्य शुल्क निर्धारित किए जाएंगे।