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विकसित नहीं हुए अनछुए पर्यटन स्थल

Mon, 26 Sep 2016 10:40 PM IST
कुल्लू
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malana - फोटो : malana
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विश्वविख्यात पर्यटन नगरी मनाली और कुल्लू में प्रतिवर्ष लाखों की तादात में सैलानी पहुंच रहे हैं। वहीं कुल्लू-मनाली का पर्यटन व्यवसाय अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चला है। कुल्लू मनाली के अनछुए पर्यटन स्थल पर्यटकों की पहुंच से कोसों दूर हैं। देश और विदेश से आने वाले सैलानी इन रमणीक स्थलों तक नहीं पहुंच पाते हैं। जिससे कुल्लू मनाली का पर्यटन व्यवसाय मनाली तक ही सीमित रह गया है। जिला में आने वाले 90 फीसदी पर्यटक मनाली घूमने आते हैं। यहां पर सैलानियों के ठहरने के लिए होटल और अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। वहीं दूसरे पर्यटन स्थलों में इस प्रकार की सुविधाओं का अभाव है। जिसके कारण सैलानी इन रमणीक स्थलों की सुंदर वादियों के दीदार करने से वंचित रह जाते हैं।
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पर्यटन व्यवसायी प्रीतम, राजेंद्र शर्मा और अनिल ठाकुर ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बिजली महादेव, चंद्रखणी, काइस धार, खीरगंगा, मलाणा, सोझा और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क आदि स्थलों में पर्यटक कम ही पहुंच पाते हैं। सबसे अधिक समस्या सड़कों की है। सड़कों से दूर होने के कारण अधिकतर पर्यटक यहां नहीं पहुंच पाते। दूूसरी समस्या है अधिकतर पर्यटन स्थलों में ठहरने की सुविधा भी नहीं है। जब इन स्थलों पर पर्यटक जाते हैं तो उनके ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश सरकार जिला कुल्लू के अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की ओर ध्यान देती है तो इससे यहां के सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। इसके साथ ही कुल्लू मनाली के पर्यटन को चार चांद भी लगेंगे।

इस संबंध में जिला पर्यटन अधिकारी रतन गौतम ने कहा कि अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए प्रपोजल भेजी गई है। नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। होम स्टे योजना के लिए काफी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं। जिससे पर्यटकों को ठहरने के लिए दिक्कत न हो। जिला कुल्लू के बिजली महादेव, चंद्रखणी पास, हामटा, मठासौर, डायनासौर, काईस धार, मलाणा, जाणा, खीरगंगा, शांघड़, सोझा, बाहू, लांबालांभरी, तीर्थन वैली, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, बशलेउ दर्रा, जलोड़ी दर्रा और सरयोलसर आदि स्थान पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाए हैं। सड़क और अन्य सुविधाओं के अभाव में बहुत कम संख्या में ही सैलानी यहां आते हैं। अनछुए पर्यटन स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं किया जा सका है। इसके बावजूद कुल्लू आने वाले पर्यटकों की तादात में इजाफा हुआ है। वर्ष 2013 में 2994907 पर्यटक कुल्लू आए। वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 3340317 तक पहुंच गया। वर्ष 2015 में 3423931 पर्यटकों ने कुल्लू का रुख किया। जिनमें काफी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
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