आजादी के बाद सड़क से सफर कर सकेंगे ग्रामीण, 13 करोड़ रुपये होंगे खर्च
सरकार ने मंजूरी के लिए नाबार्ड को भेजी 8.2 किमी लंबी सड़क की डीपीआर
बलदेव राज
कुल्लू। जिले के दुर्गम क्षेत्र रशोल के ग्रामीणों का आजादी के बाद अब पीठ से बोझ उतरेगा। विधायक प्राथमिकता के तहत मणिकर्ण घाटी की जयनाला-कटागला छलाल-रशोल सड़क का निर्माण किया जाएगा।
हालांकि सड़क निर्माण के लिए नाबार्ड से स्वीकृति मिलने का इंतजार है। सरकार ने सड़क की डीपीआर मंजूरी के लिए नाबार्ड को भेजी है।
गौर रहे कि जयनाला-कटागला छलाल-रशोल सड़क के निर्माण पर 13 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। 8.2 किलोमीटर सड़क भुंतर-मणिकर्ण मार्ग पर आने वाले जयनाला नामक स्थान से शुरू होगी। कटागला, छलाल होते हुए रशोल गांव तक सड़क निकाली जाएगी।
रशोल क्षेत्र में सड़क न होने से कई तरह की सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र के नाम से मशहूर मलाणा के साथ पर्यटक रशोल भी जाते हैं। पर्यटकों को पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। दुर्गम गांव रशोल तक सड़क निकलने से ग्रामीणों को सुविधा मिलेगी। नाबार्ड से बजट कब तक जारी होता है, यह देखने वाली बात होगी।
सरकार ने डीपीआर नाबार्ड की मंजूरी के लिए भेजी है। इसके लिए स्वीकृति मिलने का इंतजार है। सड़क निर्माण पर 13 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। - गोविंद ठाकुर, सहायक अभियंता शाट, लोक निर्माण विभाग
आठ किमी पैदल चल पहुंचती है पोलिंग पार्टी
रशोल कुल्लू में शाक्टी के बाद दूसरा दुर्गम पोलिंग बूथ माना जाता है। पोलिंग पार्टी को करीब 8 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल ही पार करनी पड़ती है। हालांकि मतदान के लिए वोटरों को जागरूक करने के लिए प्रशासन की ओर से अभियान भी यहां चलाए जाते हैं।