कुल्लू दशहरा उत्सव में कार्निवाल के दौरान होरन नृत्य पेश करते हुए।-संवाद
जिले भर की महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर दिया महिला सशक्तीकरण का संदेश
सांस्कृतिक दलों ने भी बिखेरी रौनक, हौरन नृत्य को दर्शाते दल की प्रस्तुति भी रही आकर्षण का केंद्र
बलदेव राज
कुल्लू। दशहरा उत्सव के अंतिम दिन मालरोड पर करीब 1000 महिलाओं ने पारंपरिक पट्टू और धाठू से सज-धजकर अपनी संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की और महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया।
बारिश भी महिलाओं का जोश कम नहीं कर पाई। कुल्लवी गीतों और लोकनृत्यों की थाप पर झूमती-गाती महिलाओं की रंगीन झांकी ने हजारों लोगों का मन मोह लिया। मनाली से लेकर आनी तक के महिला मंडलों ने इस त्योहार को सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी शक्ति और पहचान का जश्न बना दिया। कुल्लू की इस सांस्कृतिक धरोहर में महिलाओं की भागीदारी ने समां बांध दिया।
बुधवार सुबह 9:00 बजे से महिला मंडल ढालपुर मैदान में पहुंचने शुरू हो गए थे। इन्होंने अपना पंजीकरण करवाया। सुबह 10:00 बजे कार्निवल में निकलने वाली झांकी की तैयारियां पूरी हो गईं। रथ मैदान के पास महिला मंडलों की महिलाओं को कतार में खड़ा किया गया। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के आने के बाद कार्निवल का सिलसिला सुबह 11:20 बजे शुरू हुआ। मालरोड पर सबसे पहले ढोल-नगाड़ों के साथ आए सांस्कृतिक दल ने रौनक बिखेरी। इसके भाषा एवं संस्कृति विभाग की झांकी निकली। हौरन नृत्य को दर्शाते दल ने भी वाहवाही लूटी। प्रारंभिक शिक्षा विभाग की झांकी ने सबका ध्यान आकर्षित किया। हल्की बारिश के बीच महिलाओं ने मालरोड पर पूरे जोश के साथ झांकी निकाली। झांकी में खेल विभाग ने नशे से दूर रहते हुए खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। महिलाओं के दल ढालपुर मालरोड होते हुए कलाकेंद्र चौक, यहां से सर्कुलर रोड और वापस प्रदर्शनी मैदान पहुंचे। लोग कार्निवल देखने के लिए सुबह 10:00 बजे से पहले पहुंच गए थे। मालरोड के दोनों ओर स्वयंसेवी और पुलिस ने व्यवस्था संभाली।
मनाली से आनी तक महिलाओं ने लिया हिस्सा
कार्निवल में कुल्लू की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। झांकी में मनाली से लेकर आनी की महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। महिलाओं में उत्साह देखते ही बनता था। हालांकि कार्निवल देखने वालों का बारिश ने मजा किरकिरा कर दिया।