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दशहरा में इस बार नहीं सजेगा अस्थायी बाजार

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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार सिर्फ देव परंपराओं का ही निर्वहन होगा। दशहरा में इस बार अस्थायी बाजार नहीं सजेगा। व्यापार के लिए एक भी दुकान न लगने से दशहरा उत्सव कमेटी को नुकसान होगा। हालांकि इस बार दशहरा में स्थानीय व्यापारियों की चांदी होगी।
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सर्दियों की दस्तक के साथ शुरू होने वाले दशहरा में आने वाले लोगों को गर्म वस्त्रों की खरीदारी बाजार से करनी पड़ेगी। पिछली बार दशहरा में महज सात देवी-देवताओं को ही बुलाया गया था। ऐसे में उत्सव में लोग भी कम आए थे। लेकिन इस बार 300 से अधिक देवी-देवता दशहरा में आएंगे। हर दिन देवी-देवताओं के दर्शनों के लिए लोग ढालपुर मैदान में आएंगे। ऐसे में सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ेगा। लोअर ढालपुर, सरवरी, अखाड़ा बाजार और ढालपुर की स्थायी मार्केट की दुकानों में लोग खरीदारी को उमड़ेंगे, जो व्यापारियों के लिहाज से बेहद फायदेमंद है। आमतौर पर दशहरा में लगने वाली दुकानें एक महीना तक ढालपुर मैदान में सजी रहती थी। अधिकतर सामान लोग अस्थायी मार्केट से ही खरीदते थे, जिससे स्थानीय व्यापारियों का दशहरा के दौरान कारोबार सामान्य ही रहता था। कई बार तो व्यापार मंडल को बाहरी राज्यों से आए हुए व्यापारियों को हटाने के लिए प्रशासन से गुहार लगानी पड़ती थी। दशहरा उत्सव में लगने वाली अस्थायी मार्केट में हर साल करोड़ों का कारोबार होता है। बाहरी राज्यों से करीब एक से डेढ़ हजार व्यापारी यहां पर कारोबार करने आते हैं। इस संबंध में व्यापार मंडल कुल्लू के अध्यक्ष राकेश कोहली ने कहा कि व्यापार न सजने से निश्चित रूप से स्थानीय व्यापारियों को कुछ फायदा मिलेगा।
अस्थायी मार्केट में सस्ता मिलता है सामान
दशहरा में लगने वाली अस्थायी मार्केट में बाजार से 50 फीसदी सस्ता सामान मिलता है। अस्थायी मार्केट के बाजार में 1000 रुपये की जैकेट भी 500 रुपये में मिल जाती है। सर्दियों में लोग यहां से गर्म वस्त्र खरीदते हैं। बर्तन, रजाइयां, कंबल, कपड़े, जूते, क्राकरी और हस्तशिल्प से बने उत्पाद भी यहां बिकते हैं।
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व्यापार से होती है उत्सव कमेटी की कमाई
दशहरा में लगने वाली अस्थायी मार्केट के लिए कमेटी की ओर से प्लॉट आवंटित किए जाते हैं। डोम, झूले, कबाड़ी मार्केट, तिब्बती मार्केट, जूता मार्केट, मीना बाजार, मुख्य रोड बाजार आदि के लिए प्लॉट से करोड़ों रुपये मिलते हैं। इससे कमेटी देवी-देवताओं के नजराने, कलाकारों व अन्य खर्चे निकालती है। लेकिन इस बार कमाई नहीं होगी। इसके चलते उत्सव कमेटी देवताओं को नजराना भी नहीं दे रही है।
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