अगर आप बेहतर उत्पादन चाहते हैं तो सबसे पहले खेतों की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं। मृदा परीक्षण से खादों और आवश्यक भूमि सुधारकों की मात्रा का पता चलता है। ऐसा करने से किसान अपनी जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बनाए रख सकते हैं। इसके साथ ही किसान पैदावार भी बढ़ा सकता है।
किसानों को कृषि महकमे की ओर से जागरूकता शिविरों में मिट्टी परीक्षण के बारे में समय-समय पर जानकारी मुहैया करवाई जाती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत के मुताबिक खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग खेतों में करने से मृदा की उर्वरक शक्ति भी कायम रहेगी। आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व और खाद नहीं डालने उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। किसान अमित, राज, कमल, वीर सिंह, चमन, रेवत राम, अमन, रामचंद आदि का कहना है कि गत कई सालों से उन्होंने मृदा की जांच के बाद खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग किया तो उत्पादन उम्दा हुआ। इसके सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र वर्मा कहते हैं कि मिट्टी का नमूना बिजाई करने से पहले मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजें। उन्होंने कहा कि इसका परीक्षण मुफ्त किया जाता है। किसान-बागवान मिट्टी के परीक्षण बाद ही खादों और पोषक तत्वों का प्रयोग करें। इससे उत्पादन उम्दा हो सकता है।