कुल्लू के वाशिंग के समीप राफ्टर पर्यटको को नदी में उताकर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे है। इससे पहले भी कई बार सैलानियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।
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बवेली से बाशिंग तक ब्यास नदी में हो रही राफ्टिंग के दौरान सैलानियों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। रस्सी हाथ में थमाकर सैलानियों को चलती राफ्ट से नदी में उतारा जा रहा है। वहीं एक राफ्ट में क्षमता से अधिक सैलानियों को बैठाया जा रहा है। वहीं प्रशासन, पुलिस और पर्यटन विभाग इस संबंध में अनजान हैं। उल्लेखनीय है कि ब्यास नदी में बवेली से लेकर बाशिंग तक करीब तीन किलोमीटर की राफ्टिंग के दौरान सरकारी नियमों की सरेआम अवहेलना हो रही है। जहां हर राफ्ट में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जा रहा है।
वहीं रास्ते में सैलानियों को नदी में उतार जा रहा है। जिससे सैलानी अभी भी ब्यास की तेज प्रवाह का शिकार बन सकते है। यहीं नहीं उक्त क्षेत्र पहले ही हादसों के लिए चर्चाओं में रहा है। यहां हर साल दर्जनों हादसे होते हैं, लेकिन सभी मामलों को मौके पर ही रफा-दफा कर दिया जाता है। जब राफ्ट नदी में बीच में पहुंचती है तो राफ्ट का गाइड सैलानियों के हाथ में रस्सी थमा कर सैलानियों को नदी में छलांग लगाने को कहते हैं।
जिसके बाद उन्हें कुछ देर बाद राफ्ट में बैठा दिया जाता है, लेकिन ऐसे में पानी के तेज प्रवाह में अगर किसी के हाथ से रस्सी छूट गई तो इसका परिणाम काफी गंभीर हो सकता है। नियमों के अनुसार एक राफ्ट 6 लोगों और एक गाइड के लिए होती है। वहीं बवेली से बाशिंग तक एक राफ्ट में आठ से दस लोग और एक गाइड राफ्टिंग करवा रहा है। जो क्षमता से अधिक है। वहीं चलती राफ्ट से नदी में भी किसी को नहीं उतारा जा सकता है। लेकिन यहां इन नियमों की अवहेलना सरेआम हो रही है। गाइड हेलमेट तक पहना जरूरी नहीं समझते हैं।