कुल्लू में क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के दौरान मौत मामले को लेकर चक्का जाम के दौरान एबुलेंस को
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत के मामले में सैकड़ों लोगों ने सोमवार को सड़क पर उतरकर मशाल जुलूस निकाला। स्वास्थ्य विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डॉक्टर और स्टाफ को बर्खास्त करने की मांग उठाई। सराज घाटी के समाजसेवी बंटी सराजी के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। पूर्वाह्न 11 बजे ऐतिहासिक लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र के पास लोग एकत्रित हुए। उसके बाद से रैली के रूप में ढालपुर चौक पहुंचे। यहां पर स्वास्थ्य विभाग का पुतला फूंका।
मृतक महिला के लिए न्याय की मांग की। उपायुक्त कार्यालय होते हुए क्षेत्रीय अस्पताल के गेट पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी पहुंंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने बंद गेट को खोल कर अस्पताल परिसर में नारेबाजी की।
दोपहर बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हीरा लाल के कार्यालय पहुंचे और उनका घेराव किया। घटना के लिए जिम्मेदार डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी। एमएस ने दो दिन पहले दिए एक बयान पर प्रदर्शन करने वाले लोगों से लिखित में माफी मांगी। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर का भी घेराव किया। उनसे लापरवाह डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर रोष जताया। धरने-प्रदर्शन को जिला परिषद सदस्य विभा सिंह, निशा ठाकुर, पूर्व जिला परिषद सदस्य हितेश्वर सिंह ने भी समर्थन दिया और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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रूटीन चेकअप के लिए आई थी महिला, कर दिया सिजेरियन
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बलदेव ठाकुर उर्फ बंटी सराजी ने आरोप लगाया है कि सराज क्षेत्र की महिला 20 जून को क्षेत्रीय अस्पताल में रूटीन चेकअप के लिए आई थी। डॉक्टर ने उसका सिजेरियन कर दिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने रेफर करने का आग्रह किया तो डॉक्टरों ने उसे ठीक बताया लेकिन कुछ देर बाद महिला की मौत हो गई। हैरानी जताई कि इस घटना को नौ दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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मृतक महिला की ननद ने लगाए आरोप
मृतक महिला की ननद सपना ने बताया कि वह भाभी के साथ अस्पताल आई थीं। इससे पहले नौ बार उसका चेकअप हो चुका था। 20 जून को भी रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर अनु ने सिजेरियन के लिए तैयार होने को कहा और सिजेरियन किया। उसके बाद करीब 24 घंटे तक वह ठीक थीं। उसके बाद अचानक तबीयत बिगड़ी तो वहां मौजूद नर्स और डॉक्टर को जब जानकारी दी तो उन्होंने उसके दर्द को ड्रामा बताया। डॉक्टर ने उसे उठने को कहा और पीठ में मुक्के से दो तीन बार मार कर चलने फिरने को कहा। कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।