गुशैणी (कुल्लू)। बंजार की तीर्थन वैली गुशैणी के सेब के बगीचों में जून में ही वूली एफिड रोग ने हमला कर दिया है। शुष्क मौसम की वजह से पेड़ों की शाखाओं पर वूली एफिड (ऊन की तरह दिखने वाला सफेद रंग का मोम जैसा पदार्थ) लग रहा है। इससे हजारों बागवानों को नुकसान की चिंता सता रही है।
आमतौर पर यह कीट अक्तूबर और नवंबर में सेब के पौधों पर आक्रमण करता है, लेकिन इस बार समय से पहले ही कीट ने बगीचों में हमला बोल दिया है। यह वूली एफिड पेड़ की टहनी से रस चूसने वाला कीट है। यह पौधे में पाए जाने वाले तरल पदार्थ पर इकट्ठा हो जाते हैं। इससे पौधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार बगीचों में यूरिया खाद डालने से वूली एफिड की समस्या पैदा होती है।
कीटों के हमले से प्रभावित भागों पर छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं। ऐसे में सेब के पौधों की बढ़ने की क्षमता रुक जाती है, जबकि फल भी कम लगते हैं। बागवान हेमराज ठाकुर, केहर सिंह, योगराज, सुनील कुमार, सोमदेव, सुरेश नेगी, रामचंद्र, आलम चंद और सागर चंद ने बताया कि इस बार सेब के बगीचों में समय से पहले ही वूली एफिड रोग ने हमला कर दिया है। इससे नुकसान की चिंता भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए बागवानी विभाग को शिविर लगाने चाहिए, जिससे बागवानों को नुकसान से बचाया जा सके। संवाद
वूली एफिड से परेशान बागवान करें छिड़काव
बागवानी विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. बीएम चौहान ने बताया कि बागवान 200 लीटर पानी में एक किलो जिंक सल्फेट और 200 ग्राम बोरिक एसिड का घोल बनाकर पेड़ों पर छिड़काव करें। यह घोल 20 से 25 पेड़ों में छिड़काव के लिए उपयुक्त रहेगा। जिन पेड़ों पर वूली एफिड की मार पड़ी है, वहां इस घोल को तेज छिड़काव करने से भी राहत मिलेगी। उधर, बंजार के विषयवाद विशेषज्ञ रामनाथ ने बताया कि बागवानों को एडवाइजरी जारी कर दी है।