कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू की लोअर बेल्ट में लोग अनार की खेती कर रहे हैं। बेहतर दाम मिलने से अनार उत्पादकों की आर्थिकी मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों की मानें तो कुल्लू जिला के निचले क्षेत्र की आबोहवा इसकी पैदावार के लिए उपयुक्त है।
पिछले डेढ़ दशक में जिले में अनार ने अपनी अलग पहचान बना ली है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम में बदलाव ने यहां के बागवानों का भी बागवानी का नजरिया बदलने को विवश कर दिया है। जिले के बजौरा, हुरला, कलैहली, थरास, गड़सा और खराहल के निचले क्षेत्रों में अनार का सफल उत्पादन हो रहा है। बागवानों को उत्साहवर्धक नतीजे मिल रहे हैं। जिला कुल्लू में करीब 1500 हेक्टेयर जमीन पर अनार की खेती हो रही है। अनार की खेती में नए-नए प्रयोग भी करने लगे हैं। अनार उत्पादक दुष्यंत ठाकुर का कहना है कि अनार का पौधा तीन साल में ही फल देता है। जिले में इन दिनों अनार का सीजन आरंभ हो चुका है। उत्पादकों को स्थानीय मंडियों में अच्छे दाम मिल रहे हैं। बंदरोल सब्जी मंडी में सोमवार को अनार की बोली 71 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से लगी है। घाटी के अनार उत्पादक अर्जन महंत, सुनू राम, अशोक, ज्ञान ठाकुर, दुनी चंद, कुष्ण कुमार व चमन आदि ने कहा कि डेढ़ दशक में अनार की खेती का दायरा काफी बढ़ गया हैै। उन्होंने कहा कि अनार के बेहतर दाम मिलने से बागवान इसकी खेती को तरजीह देने लगा है। बंदरोल आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मोहन ठाकुर ने कहा कि सोमवार को सब्जी मंडी में अनार 71 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिका है।
बागवानों को प्रोत्साहित कर रहा विभाग
कुल्लू स्थित बागवानी विभाग के विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने बताया कि बागवानों को अनार की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभाग प्रयासरत है। विभाग समय-समय पर अनार उत्पादित क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगा कर बागवानों को जानकारी उपलब्ध करवाता है।
इन किस्मों की हो रही पैदावार
कुल्लू में विभिन्न वैरायटी का अनार पैदा हो रहा है। जिले में कांधारी, काबुली, गणेश, सिंधूरी और कांधारी सीडलैस, मृदुला सीडलैस किस्में उगाई जा रही हैं। अनार में कई पोषक तत्व होते हैं। इसके सेवन से कई बीमारियां से निजात मिलती है।