उदयपुर उपमंडल में झूले को पार करती महिलाएं।
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उदयपुर उपमंडल के तहत आती मयाड़ घाटी के करपटवासी कब तक नगदी फसलों को झूले से मार्केट तक पहुंचाते रहेंगे। इनके लिए यह एक बड़ी समस्या बनी हुई है। पुल निर्माण में हो रही देरी से ग्रामीणों में लोनिवि के प्रति भारी रोष है। घाटी में सीजन शुरू होने के बाद भी अभी तक पुल निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे भी झूले से अगस्त 2013 से नदी को आरपार कर रहे हैं।
पूर्व में भाजपा सरकार के दौरान करपट गांव के लिए मयाड़ नाले में फुटब्रिज बना था जो अगस्त 2013 को बाढ़ की चपेट में आ गया था। उसी दिन से करपट के लोग अपनी नकदी फसलों को झूले के सहारे बाहर निकालते हैं। लिहाजा, गर्मियों के दिनों उफनती नाले के बहाव के बीच झूले से फसलों को बाहर निकालना आसान काम नहीं है। 29 घरों की आबादी वाले करपट गांव के लोगों की मुश्किलें कब खत्म होंगी।
इसी गांव से ताल्लुक रखने वाली चिमरट पंचायत प्रधान प्रेमदासी ने बताया कि वर्ष 2013 में करपट पुल बह जाने के बाद प्रशासन ने दो झूले लगा दिए, लेकिन झूले और तार स्पेन से फसलों को बाहर निकलना आसान काम नहीं है। भाजपा के पूर्व मंत्री डा. राम लाल मारकंडेय ने कहा कि करपट गांव को जल्द रोपवे ब्रिज बनाया जाए। उन्होंने कहा कि लोनिवि फसल तैयार होने से पहले पुल तैयार नहीं करता है तो ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा। वहीं, इस संदर्भ में लोक निर्माण विभाग चिनाव मंडल उदयपुर के एक्सईएन अनिल परमार ने बताया कि सुपर स्ट्रक्चर फेम मंगवा दिए हैं। तीन माह में पुल तैयार कर लोगों को सुविधा दी जाएगी।