यांगला गांव में दिनदहाड़े घरों के पास खेत में घूमता दिखा भूरा भालू
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी के वामतट पर बसे लोगों की भालुओं से मुश्किलें हर बार बढ़ती जा रही हैं। कई क्षेत्रों में भालू दिनदहाड़े रिहायशी इलाकों और खेतों में आ जाते हैं। इन दिनों घाटी में खेत खलिहानों में काम तेजी से चल रहा है। लोगों को सुबह-शाम दूरदराज के खेतों में कामकाज के लिए आना जाना पड़ रहा है।
भालुओं के रिहायशी इलाकों में आने से लोग अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। भालू फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। पिछले तीन-चार साल से भालुओं के आतंक से वामतट के लोग परेशान हैं। भालुओं ने फलदार सेब पौधों को भारी नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग ने सेब पौधों के नुकसान का आकलन तो किया है, मगर अभी तक किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। शनिवार को गोंधला पंचायत के यांगला गांव में एक भूरा भालू दिनदहाड़े खेतों में घूमता दिखा। लोगों ने इसके वीडियो बनाए। सबसे अधिक नुकसान जोबरंग और नालडा पंचायत के किसान-बागवानों का होता है।
जोबरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोमदेव योकी का कहना है कि भालुओं ने सेब से लदे पौधों की तोड़ फोड़ कर उनकी मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। लोगों के सेब बगीचों को नुकसान पहुंचाया है। भालुओं के आतंक से निजात को लेकर वन विभाग से भी बात की है, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है। सिस्सू में तैनात वन विभाग के खंड अधिकारी बालक राम ने बताया कि भालुओं को पटाखों और शोरगुल से ही भगाया जा सकता है। संवाद
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