अधिष्ठात्री माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी के मंदिर स्थित पुईद में शनिवार को काहिका उत्सव का आयोजन हुआ। काहिका उत्सव में मरने के बाद नड़ एक बार फिर जिंदा हो गया। दैवीय चमत्कार के सैकड़ों लोग साक्षी बने। जिंदगी और मौत के इस खेल में नड़ की विशेष भूमिका रामनाथ ने बखूबी निभाई।
दाह संस्कार में इस्तेमाल होने वाले पंचरत्न और दस द्वारों की भी पूरी व्यवस्था थी। शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी के सौह में काहिका मंडप से हुल्की नृत्य शुरू हो गया। इस खेल में सीता की भूमिका नड़ की पत्नी ने अदा की। नड़ की पत्नी ने भी काहिका में विशेष नृत्य देवलुओं के संग किया। शाम के साढ़े चार बजे मंदिर से करीब आधा किलोमीटर दूर चिह्नित स्थान पर नड़ को देव वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच ले जाया गया। जहां पर माता के मुख्य देवलु ने बंदूक से हवाई फायर किया। फायर होते ही नड़ रामनाथ मूर्छित होकर जमीन पर गिरा। कफन ओढ़कर उसका जनाजा निकाला गया। जनाजे को घराकड़ के मुख्य हारियानों ने माता के प्रांगण तक अपनी बाहों में उठाकर लाया। देवता थान शीम के गूरों और माता के कारकूनों ने नड़ की पत्नी के आग्रह पर उसे फिर से जीवित करने की प्रक्रिया शुरू की। कुछ देर तक लोगों की सांसें भी थमी रहीं। नड़ को जीवित करने की प्रक्रिया करीब आधा घंटे तक चली।
माता के गूर ने रामनाथ पर पवित्र जल मंत्रित कर छिड़का। जल छिड़कते ही रामनाथ होश में आ गया और हजारों लोग इस अद्भुत दैवीय खेल के साक्षी बने। नड़ के जीवित होते ही लोगों ने माता के चरणों में शीश नवाया। वहीं, भेखली मंदिर में 23 सालों बाद हुए काहिका उत्सव में देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। काहिका में आधा दर्जन से अधिक देवताओं ने हाजिरी भरी।