अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल के विरोध में प्रदर्शन करते अधिवक्ता। -संवाद
कुल्लू। भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। कुल्लू बार काउंसिल के अधिवक्ताओं ने इसे ‘शोषण बिल’ करार दिया। अधिवक्ताओं ने मंगलवार सुबह 10:00 बजे उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके साथ ही न्यायालय का कामकाज ठप रखा।
बार काउंसिल कुल्लू के अध्यक्ष तेजा ठाकुर के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने सरकार के कानून मंत्री को ज्ञापन भेजकर संशोधन रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 2025 में प्रस्तावित संशोधन बिल अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन है। इससे अधिवक्ता अपने अधिकारों को लेकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा इस कानून में अधिवक्ताओं पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाने की कोशिश की जा रही है।
काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष संजय ठाकुर ने कहा कि 1961 अधिवक्ता अधिनियम के संशोधन का जो ड्राफ्ट दिखाया गया है, उसमें अगर किसी भी उपभोक्ता को अधिवक्ताओं से शिकायत है, तो कानून में पांच सदस्य डिसिप्लिनरी कमेटी में तीन सदस्य केंद्र सरकार और एक सदस्य बार काउंसिल का सदस्य रहेगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता हमेशा गरीब तबके के लिए मेहनत करते हैं और उनके अधिकारों के लिए लड़ते हैं। मगर संशोधन के बाद अधिवक्ता अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस फैसल को वापस नहीं लेती है, तब तक अधिवक्ता का धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे।