संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जमीन की धांधली और लड़ाई-झगड़े की समस्या अब जड़ से खत्म हो जाएगी। किस की जमीन पर किसने कुंडली मारी है, बंदोबस्त होने से जमीन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
जनजातीय क्षेत्र लाहौल में 64 साल बाद बंदोबस्त किया जाएगा। नायब तहसीलदार को भी लाहौल भेजा गया है। इसका खुलासा तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने किया। मंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग ने भी कई घपले किए हैं। इसमें सड़कों को ही नौतोड़ में डाल दिया है।
बंदोबस्त से जमीन की हेराफेरी, किसी की जमीन पर कब्जा, जंगल, टीडी और चारागाह सभी अधिकारों का पता चल जाएगा। लोगों की शिकायत है कि लंबे समय से लाहौल घाटी में बंदोबस्त न होने से उन्हें कई जगह पर अपनी जमीन का पता नहीं चल रहा है। अब बंदोबस्त के बाद सब ठीक हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि क्षेत्रफल के लिहाज से हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े लाहौल-स्पीति जिले के लाहौल में 64 साल बाद बंदोबस्त होने जा रहा है। करीब 13 हजार वर्ग किलोमीटर में लाहौल-स्पीति जिले का क्षेत्रफल है। आज के युवा पीढ़ी भले अपने पूर्वजों की जमीन को चला रहे हो, लेकिन उन्हें कई हिस्सों में अपनी जमीन कहां और किसके नाम पर है, इसका भी पता नही है। लाहौल निवासी बुजुर्ग प्रेम लाल, रिग्जिन बौद्ध और मंगल चंद का कहना है कि उन्होंने सिर्फ बंदोबस्त का नाम सुना है। मंगल चंद ने कहा कि कई लोग किसी दूसरे की जमीन पर हक मारकर बैठे हैं। अब बंदोबस्त से सब स्थिति साफ होगी। राजस्व विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि लाहौल में 64 वर्ष पहले ही बंदोबस्त हुआ है। मारकंडा ने कहा कि इस साल लाहौल में बंदोबस्त का कार्य होगा और इसको लेकर बंदोबस्त के आदेश हो गए हैं। कहा कि इसके लिए नायब तहसीलदार को भी भेजा गया है।