केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में निगम की बसें यात्रियों की जान पर कब भारी पड़ जाएं, कुछ नहीं कहा जा सकता है। वर्तमान समय में एचआरटीसी की केलांग डिपो के पास करीब 70 बसें हैं। इसके अलावा तीन टेंपो ट्रैवलर और तीन इलेक्ट्रिक वैन भी हैं। हैरत की बात ये है कि 70 बसों में से एक दर्जन से अधिक बसें ऐसी हैं जो समयावधि को पार कर लाहौल-स्पीति के साथ चंबा जिले के पांगी क्षेत्र की अति दुर्गम सड़कों पर दौड़ रही हैं। ऐसे में इन बसों में सफर करना सुरक्षित भी नहीं माना जा रहा है। यात्रियों की भी मजबूरी है कि लाहौल-स्पीति और पांगी घाटी में केवल निगम की ही बसें दौड़ती हैं। हालात ये हैं कि कई बसें चलते-चलते बीच सड़क पर खड़ी हो रही हैं और यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है।
ऐसे में लाहौल घाटी के लोगों ने प्रदेश सरकार और निगम के अधिकारियों से गुहार लगाई है कि एचआरटीसी की केलांग डिपो को नई बसें दी जाएं। लाहौल निवासी पवन कुमार, दिनेश लाल, महेंद्र सिंह और राजेश ने बताया कि एचआरटीसी केलांग डिपो की कई बसों में यात्रा करना सुरक्षित नहीं है। कई बसें समयावधि को पार कर चुकी हैं और कभी भी सड़क पर खड़ी हो जाती हैं। निगम से मिली जानकारी के अनुसार गत वर्ष केलांग डिपो को सात नई बसें मिली थीं। इससे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी लेकिन निगम प्रबंधन नई बसों को लंबे रूट पर भेजने को मजबूर है। कुछ खटारा बसों को लाहौल-स्पीति और पांगी घाटी के लिए चलाया जाता है।