कुल्लू जिला में शिरढ काहिका के दौरान निकले देवी-देवता।-संवाद
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कुल्लू/खराहल। शिरढ़ में देवता कालिया के सम्मान में काहिका उत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव का मुख्य आकर्षण नड़ को मूर्च्छा के बाद दैवीय शक्ति के साथ फिर जिंदा करना रहा। इस दैवीय खेल को देखने के लिए सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
कालिया नाग और आठ अन्य देवता की देखरेख में ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों के बीच नड़ को नागणी सौह ले जाया गया। यहां चारों दिशा में तीर छोड़कर दैवीय शक्ति के साथ नड़ को मूर्छित किया गया। इसके देवता कालिया नाग के सौह में नड़ को जीवित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। कुछ देर तक लोगों की सांसें थमी रहीं। देवताओं के गुर ने नड़ अंनत राम पर मंत्रित कर पवित्र जल छिड़का। जल के छिड़कते ही नड़ होश में आ गया। इसके बाद सैकड़ों भक्तों के मस्तक देवताओं के चरणों में झुक गए।
कालिया नाग के कारदार पुनीत महंत ने कहा कि काहिका उत्सव में देव परंपरा को सदियों से निर्वहन हो रहा है। उन्होंने कहा कि तीन साल के बाद शिरढ काहिका उत्सव हुआ है। काहिका उत्सव देव विधिविधान के साथ मनाया गया। उन्होंने कहा कि इस मौके देवता कालिया नाग, नारायण देवता शिलीहार, नाग धूमल हलाण, पनगां गौरी, काली नाग कराल, परमेश्वरी व्यासर, गौर देवता बंदरोल, पाषकोल शिगरी आदि ने काहिका उत्सव में हाजिरी भरी।
मेला कमेटी के अध्यक्ष मोहिंद्र महंत ने कहा कि यह परंपरा सदियों से चल रही है। चार जून को शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर मेले के समापन पर बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। वे विजेता खिलाड़ियों को इनाम बांटेंगे।