हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को लेकर सरकार की पॉलिसी लागू हो गई है। अब किसान और अन्य इच्छुक लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत भांग की खेती के लिए आवेदन कर सकेंगे। कुल्लू सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भांग की खेती के लिए प्रति बीघा के हिसाब से आवेदन किया जा सकेगा।
विधायक ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में भांग की खेती को नशे के लिए बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय ऐसी भांग तैयार करने पर जोर रहेगा, जिसका इस्तेमाल औद्योगिक और औषधीय जरूरतों के लिए किया जा सके। उन्होंने कहा कि भांग के रेशे से कपड़े और शॉल तैयार किए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पारंपरिक खेती के साथ रोजगार का एक नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि जिन पौधों में औषधीय गुण होंगे, उनके उपयोग के लिए प्रदेश में उद्योग स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए बड़ी कंपनियों को हिमाचल में निवेश के लिए आकर्षित किया जाएगा। विधायक के अनुसार, डाबर जैसी बड़ी कंपनियां प्रदेश में यूनिट स्थापित करने के लिए आगे आ सकती हैं। इससे भांग की खेती से लेकर उसके प्रसंस्करण और उत्पाद तैयार करने तक रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
नशे के बजाय रोजगार पर जोर
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में ऐसे लोगों को भी वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने की जरूरत है, जो लंबे समय से भांग और इसके नशे से जुड़े रहे हैं। सरकार की नीति का उद्देश्य भांग को नशे के स्रोत के तौर पर बढ़ावा देना नहीं, बल्कि नियंत्रित और उपयोगी खेती के माध्यम से रोजगार तथा उद्योग को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर तक इस नीति का प्रचार किया जाएगा, ताकि लोगों को इसकी प्रक्रिया और उपयोग के बारे में जानकारी मिल सके। किसानों को यह समझाया जाएगा कि किस प्रकार की भांग की खेती की अनुमति होगी और इसका इस्तेमाल किन क्षेत्रों में किया जा सकेगा।