देवता जुआणी महादेव के मंदिर स्थित न्योली में दियाली की परंपरा के दौरान खेल खेलते हुए देवलू। हु
खराहल (कुल्लू)। जिला मुख्यालय के साथ लगती खराहल घाटी में दियाली उत्सव की धूम रही। आराध्य देवता जुआणी महादेव और थान देवता के मंदिरों में ब्रह्म मुहूर्त में पहली परिक्रमा मंगलवार सुबह आरंभ हुई। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। इस दौरान थरमाण, ग्राहण, न्योली और जुआणी में लोगों ने देवता के देवलुओं के ऊपर अखरोट भी फेंके।
दोपहर बाद थान देवता के हारियान और देवलू ढोल-नगाड़ों की स्वरलहरियों के बीच न्योली स्थित जुआणी महादेव के मंदिर में पहुंचे। देवता के सौह में देवलु एक-दूसरे पर अश्लील जुमले कसते खेल खेलते रहे। इसके बाद देव परंपरा के अनुसार गूण तोड़ने की रस्म शुरू हुई। इससे पहले गूण बनाने के लिए हर घर से पराल एकत्रित किया गया।
विशेष घास और पराल को जुआणी महादेव के प्रांगण स्थित जुआणी में सौंपा। यहां पर गूर और देवलुओं ने देव विधि के साथ गूण (घास का रस्सा) तैयार किया। शाम को गूण को वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के साथ मंदिर न्योली लाया गया और अंगु के पेड़ में लपेटा। इस दौरान परंपरानुसार अश्लील जुमले भी बोले गए।
इसके पश्चात दोनों देवताओं के देवलुओं के बीच गूण तोड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। गुण दो हिस्सों में टूट गया, जो घाटी के लिए सुख-समृद्धि प्रतीक माना जाता है। जुआणी महादेव के कारदार ओम प्रकाश महंत और थान देवता के पुजारी गौतम भंडारी ने कहा कि गूण के दो हिस्सों में टूटा है, जो घाटी के लिए शुभ माना जाता है। गूण के दो से ज्यादा भागों में टूटने पर इसे अशुभ माना जाता है। इस परंपरा का निर्वहन सदियों से हो रहा है।
देवता जुआणी महादेव के मंदिर स्थित न्योली में दियाली की परंपरा के दौरान खेल खेलते हुए देवलू। हु