देव आदेश पर पांच दिन नौ गांवों में कृषि कार्य पर प्रतिबंध
शिवलिंग पर सुशोभित हुआ जुआणी महादेव का सतयुगी मोहरा
देव आदेश के चलते खराहल घाटी के नौ गांवों में कृषि कार्य पर लगी रोक
देवता जुआणी महादेव का है मोहरा, देव विधि विधान का किया निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। घाटी के आराध्य देवता जुआणी महादेव का सतयुगी का मोहरा शनिवार सुबह 4:00 बजे देव विधि के साथ ऐतिहासिक शिवलिंग पर सुशोभित हुआ है। मोहरा शिवलिंग पर पांच दिनों तक सुशोभित रहेगा। मुख्य मोहरे के शिवलिंग पर सुशोभित होने के बाद हारियान क्षेत्र में कृषि कार्यों पर विराम लग गया है। घाटी के नौ गांवों के खेत-खलिहान में हल नहीं चलाया जाएगा। न ही लोहे के औजार से कोई काम किया जाएगा। यह देव आदेश हारियानों पर पांच दिन तक रहेगा।
शनिवार को बैसाख संक्रांति की सुबह देवता जुआणी महादेव के सतयुग कालीन मुख्य मोहरे को ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की स्वर लहरियों के बीच महादेव मंदिर स्थित न्योली में शिवलिंग पर देवता के पुरोहित मनोज शर्मा ने विधि के अनुसार सुशोभित किया। मंदिर में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ तमाम देव विधि का निर्वहन किया। पुरोहित मनोज शर्मा ने कहा कि पांच दिन तक मोहरा शिवलिंग पर सुशोभित रहेगा। महादेव युवा मंडल के प्रधान गोपाल महंत, समिति सदस्य विशाल महंत और पूर्व उपप्रधान एवं महादेव के पुजारी महेंद्र ने कहा कि पांच दिनों तक मंदिर में मोहरे के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। इसी के साथ विरशू उत्सव का भी आगाज हो गया है।
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साल में दो बार सुशोभित होता है मोहरा : कारदार
देवता के कारदार ओम प्रकाश महंत कहा कि सतयुगी मोहरा साल में दो बार शिवलिंग पर सुशोभित होता है। बैशाख संक्रांति और श्रावण माह में यह मोहरा सुशोभित होता है। मोहरा शिवलिंग पर स्थापित होते ही कृषि कार्य पर पांच दिन तक प्रतिबंध लगा है। मोहरे के भंडारण के बाद ही खेतों में हल चलाने और अन्य कार्य आरंभ होंगे। इस देव आदेश का पालन हारियान करते हैं।
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